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आगरा जहरीली शराब कांड: 12 घंटे लैब परीक्षण में जुटे पांच वैज्ञानिक, तीन चरणों की जांच में मिला मिथाइल अल्कोहल

Fri, 27 Aug 2021 10:44 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

एडीजी के आदेश के बाद वैज्ञानिकों की टीम ने परीक्षण बुधवार सुबह दस बजे से शुरू कर दिया था। शाम तकरीबन छह बजे के बाद रिपोर्ट देना शुरू कर दिया।
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आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा में डौकी के गांव कौलारा कला, बरकुला और ताजगंज के नगला देवरी के चार मृतकों की विसरा जांच को पूरा करने में विधि विज्ञान प्रयोगशाला के पांच वैज्ञानिकों की टीम ने 12 घंटे परीक्षण किया। इसके बाद मौत का राज सामने आया। विसरा में मिथाइल अल्कोहल की पुष्टि हुई। मतलब साफ था कि शराब जहरीली थी।

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शराब पीने के बाद मौत पर प्रशासन कार्रवाई कर रहा था। मगर, मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण साफ नहीं हो सका था। ग्रामीणों ने जो लक्षण बताए, वो शराब के जहरीली होने पर होते हैं। इस पर एडीजी राजीव कृष्ण ने विसरा जांच के लिए भिजवाए। जांच रिपोर्ट 24 घंटे में मांगी थी। एडीजी के आदेश के बाद वैज्ञानिकों की टीम ने परीक्षण बुधवार सुबह दस बजे से शुरू कर दिया था। शाम तकरीबन छह बजे के बाद रिपोर्ट देना शुरू कर दिया। 12 घंटे में चारों विसरा का परीक्षण पूरा हो गया। मिथाइल अल्कोहल की पुष्टि हो गई। यह पुलिस के लिए अहम साक्ष्य बनेगा। आरोपियों को सजा दिलाई जा सकेगी।

जहरीली शराब - फोटो : अमर उजाला
चरण : 1
स्टीम डिस्टिलेशन से विसरा की जांच

वैज्ञानिकों के मुताबिक, विसरा के रूप में आंत, लिवर, किडनी, पेट और स्पिलीन को लिया जाता है। स्टीम डिस्टिलेशन जांच के लिए पेट, किडनी और स्पिलीन को छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में लिया जाता है। इसमें यह देखा जाता है कि इथाइल अल्कोहल है या फिर मिथाइल अल्कोहल है। इसके अलावा पानी का भी पता लगाया जाता है। पानी सौ डिग्री सेल्सियस पर भाप बनता है। इथाइल अल्कोहल 78 डिग्री सेल्सियस और मिथाइल अल्कोहल 64 डिग्री सेल्सियस पर भाप बनता है। स्टीम डिस्टिलेशन की प्रक्रिया में मिथाइल अल्कोहल पहले आता है। इसे माइक्रोस्कोप से देखा जाता है। इससे उसकी पहचान हो जाती है। जांच के लिए 15-20 मिलीलीटर पानी में मिथाइल और इथाइल अल्कोहल मिश्रण मिलाते हैं। इससे मिथाइल अल्कोहल की मात्रा का पता लग जाता है।

चरण : 2
यूरिया की जांच करना

असली अंग्रेजी शराब में 42 से 45 प्रतिशत तक  इथाइल अल्कोहल होता है। बियर में सात प्रतिशत तक होता है। नकली शराब बनाने वाले कच्ची और देशी शराब में कई मिश्रण करते हैं। मिथाइल अल्कोहल के साथ यूरिया, डायजापाम, क्लोरह हाइड्रेड तक मिलाया जाता है। यूरिया की जांच के लिए वैज्ञानिक विसरा में अपच पदार्थों की जांच करते हैं। इसके लिए विसरा को महीन पीसकर छाना जाता है। वाटरबाथ पर हीट करते हैं। इससे यूरिया बचा रह जाता है। बाद में यूरिया टेस्ट करते हैं। 

चरण : 3
क्लोरल हाईड्रेड का भी करते हैं पता

शराब में तीव्रता बढ़ाने के लिए क्लोरल हाईड्रेड भी मिलाया जाता था। इसकी भी जांच वैज्ञानिक करते हैं। अपच पदार्थ से ही क्लोरल हाईड्रेड का पता चल जाता है। इसके लिए भी स्टीम डिस्टिलेशन करते हैं।
 
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मिथाइल अल्कोहल पीने पर लक्षण
मिथाइल अल्कोहल पीने वाले की आंख पर सबसे पहले असर आता है। आंखों की रोशनी चली जाती है। इसके बाद उल्टी होने, पेट दर्द का लक्षण आता है। मिथाइल अल्कोहल पूरी तरह से जहर होता है। यह इथाइल अल्कोहल में थोड़ा भी मिल जाए तो जहर का काम करता है। इससे ऑक्सीजन का स्तर पर भी 60 से 70 तक रह जाता है। इससे सांस लेने में दिक्कत होती है। हार्ट अटैक भी आ जाता है। इससे जान चली जाती है। शमसाबाद, डौकी और ताजगंज में मरने वालों में भी यही लक्षण नजर आए थे। एक की मौत का कारण हार्ट अटैक भी आया था।
(सेवानिवृत्त फोरेंसिक एक्सपर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक)

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