फुटवियर एवं चमड़ा उद्योग विकास परिषद के चेयरमैन व प्रमुख उद्योगपति पूरन डावर को ब्लैकमेल कर उनसे पांच करोड़ रुपये की मांग की गई। आयकर विभाग में फाइल रुकवाने के नाम पर भरतपुर हाउस स्थित उनकी कोठी पर 4 पन्नों का पत्र पहुंचाया गया था। उद्योगपति की शिकायत पर पुलिस आयुक्त ने सिकंदरा पुलिस की टीम को लगाया। टीम ने दो पूर्व कर्मचारी और एक चाय विक्रेता को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
उद्योगपति पूरन डावर ने बताया कि कोठी पर तीन दिन पहले एक पत्र भेजा गया था। यह हैंडराइटिंग में था। पत्र में कहा गया था कि उनकी फाइल को आईटी के रेड कमिश्नर के पास जाने से रुकवाया गया है। इसके बदले में पांच करोड़ देने के लिए लिखा गया था। उन्होंने पुलिस आयुक्त को जानकारी दी। पत्र के साथ एक पर्ची लगाई गई थी।
लिखा था कि इसी पर्ची को लगाकर गुरुद्वारा गुरु का ताल के सामने स्थित चाय वाले के पास पार्सल पहुंचा देना। उससे कहना कि कार्टन में किताबे हैं। पत्र के साथ आईटी की फाइल थी। वहीं किसी को बताने पर फाइल अधिकारियों तक पहुंचाने के बारे में धमकी दी थी। 12 अक्तूबर को दोपहर 12 बजे तक पार्सल पहुंचाने थे।
एसीपी हरीपर्वत अक्षय संजय महाडिक ने बताया कि सिकंदरा थाना प्रभारी के साथ सादा कपड़ों में टीम को लगाया गया। जिस चाय की दुकान पर पार्सल पहुंचाना था, उसके आसपास सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए गए। वहीं पुलिसकर्मी सादा कपड़ों में पहुंच गए। उद्योगपति के कर्मचारी ने पार्सल पहुंचाए और चाय विक्रेता को पर्ची थमा दी। उसने बिना सवाल किए पार्सल रख लिया। मगर तब कोई नहीं पहुंचा था। काफी देर तक दो लोग आसपास घूमते रहे। बाद में पार्सल देखने पहुंचे। तभी पुलिस ने दबोच लिया। उन्हें थाने लेकर आए।
पूरे खेल के पीछे कोई और
पुलिस ने चाय विक्रेता को भी पकड़ लिया। उससे पूछताछ की जा रही है। पकड़े गए दोनों लोग पूर्व में उद्योगपति की फैक्टरी में मजदूरी का कार्य करने के लिए गए थे। हालांकि जिस तरह से रकम मांगने की योजना बनाई गई, वह कोई मजदूर वर्ग का व्यक्ति नहीं कर सकता है। पकड़े गए दोनों लोग पढ़े-लिखे भी नहीं हैं। इसलिए पुलिस तीनों की काॅल डिटेल खंगाल रही है। उनके संपर्क में काैन लोग हैं, यह पता किया जा रहा है। यह भी हो सकता है कि पर्दे के पीछे कोई और हो। पकड़े गए लोगों को रुपयों का लालच देकर बुलाया गया होगा।