आगरा में नगर निगम कार्यकारिणी के चुनाव में एक बार फिर भाजपा का दबदबा नजर आया। 100 में से 66 पार्षद वाली भाजपा ने कार्यकारिणी के 6 पदों में से 5 पर अपने पार्षदों को भेजा जबकि बसपा का केवल एक पार्षद ही कार्यकारिणी के लिए चुना गया। 34 पार्षदों के विपक्ष में होने के कारण दो सदस्य चुने जा सकते थे, लेकिन विपक्षी दलों में एकता और सहमति न होने के कारण बसपा का एक पार्षद ही चुना जा सका। कार्यकारिणी चुनाव निर्विरोध ही हुए।
नगर निगम सदन कक्ष में शनिवार सुबह 11:30 बजे कार्यकारिणी के 6 सदस्याें के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। भाजपा की ओर से 6 सीटों के लिए 7 पार्षदों ने नामांकन पत्र दाखिल किए। इनमें राकेश जैन, फूल कुमारी, प्रियंका अग्रवाल, वीरेंद्र लोधी, विक्रांत कुशवाह, शरद चौहान और निधि सिंह रहे, जबकि बसपा से पार्षद दल नेता सुहैल कुरैशी, मो. आसिफ, पुष्पा कुमारी और सज्जन अली ने नामांकन किया।
इस तरह कुल 11 नामांकन पत्र दाखिल किए गए। इनमें से दो के नामांकन अधूरे होने के कारण निरस्त कर दिए गए। भाजपा और बसपा पार्षद दल की बैठक के बाद बनी सहमति में निर्विरोध चुनाव प्रक्रिया पूरी करने पर जोर दिया गया। इसके बाद तीन पार्षदों ने नामांकन पत्र वापस ले लिए। इससे छह सीटों के लिए छह पार्षद ही रह गए, जिनके निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा मेयर हेमलता दिवाकर ने की।
कार्यकारिणी में यह चुने गए
सहमति बनने के बाद कार्यकारिणी के छह सदस्यों में भाजपा के पांच पार्षद राकेश जैन, फूल कुमारी, प्रियंका अग्रवाल, वीरेंद्र लोधी, विक्रांत कुशवाह तथा बसपा के मो. आसिफ को चुना गया। भाजपा के 66 पार्षद हैं, जबकि बसपा के 24 पार्षद हैं। कार्यकारिणी सदस्यों के चुनाव में पदेन सदस्यों की जरूरत नहीं पड़ी। सांसद, विधायक और एमएलसी नगर निगम के पदेन सदस्य हैं। इनमें से कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य और विधायक जीएस धर्मेश ही नगर निगम आए। मतदान की स्थिति होने पर पार्टी अपने सभी सांसदों, विधायकों को बुलाती। इस चुनाव को संपन्न कराने के लिए प्रशासन से सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी निर्मला फौजदार विशेष रूप से आईं, वहीं पूर्व सचिवालय अधीक्षक लायक राम शर्मा को बुलवाया गया था। इस दौरान अपर नगर आयुक्त सत्येंद्र कुमार तिवारी तथा शिशिर कुमार मौजूद रहे।