आगरा। राम मंदिर आंदोलन के दौरान 35 वर्ष पहले थाना हरीपर्वत में दर्ज आपराधिक मामले में विशेष मजिस्ट्रेट एमपी-एमएलए कोर्ट अनुज कुमार सिंह ने पूर्व भाजपा विधायक राम प्रताप सिंह चौहान, भाजपा नेता प्रमोद कुमार गुप्ता, उमा शंकर गुप्ता , मुकेश शर्मा और राजेश गुप्ता को दोष मुक्त करने के आदेश दिए। अदालत में सालों चली सुनवाई के बाद भी अकेले विवेचक की गवाही दर्ज हुई थी।
थाना हरीपर्वत में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार तत्कालीन उपनिरीक्षक श्याम पाल सिंह ने आरोप लगाया था कि 24 अक्तूबर 1990 की सुबह करीब 11:30 बजे वह पुलिस टीम के साथ थाना क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। उस दौरान 20 से 25 युवक नारेबाजी करते हुए गांधी नगर चौराहे आ गए, वहां खुली दुकानों को जबरन बंद कराना शुरू कर दिया। दुकानदारों के विरोध पर उन्होंने गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी। इसी बीच आरोपी प्रमोद कुमार गुप्ता विशेष समुदाय के खिलाफ नारे लगाने लगे। जिससे माहौल खराब होने लगा। पुलिस ने गांधी नगर निवासी पूर्व भाजपा विधायक राम प्रताप सिंह चौहान , उमा शंकर गुप्ता, मुकेश शर्मा, राजेश कुमार और प्रमोद कुमार गुप्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। मामले के विचारण के दौरान कई गवाह होने के बाद भी मुकदमे के विवेचक बीएस त्यागी की ही गवाही दर्ज हुई।