आगरा में राशन माफिया सुमित अग्रवाल और उसके साथियों के विरुद्ध पुलिस ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के साथ ही भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा में केस दर्ज किया है। आगरा कमिश्नरेट में किसी राशन माफिया पर नए कानून में पहली दफा सिंडिकेट चलाने का केस दर्ज किया गया है। इसमें आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। पुलिस ने शुक्रवार को तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। जमानती धारा नहीं होने के कारण न्यायालय ने तीनों को जेल भेज दिया।
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कागारौल पुलिस ने बृहस्पतिवार को जगनेर मार्ग पर चेकिंग के दौरान सरकारी चावल से भरे लोडिंग वाहन को पकड़ा था। रूपवास, भरतपुर के चालक सईद से पूछताछ में राशन माफिया सुमित अग्रवाल, गोपाल उर्फ हेमेंद्र और रूपवास के झब्बू का नाम सामने आया था। सईद वर्तमान में धनौली में रहता है। पूछताछ में पता चला कि उसे गोपाल ने धनौली से चावल लेकर बसई नवाब में झब्बू के गोदाम पर भेजा था। इसकी भनक लगने पर सरकारी चावल को छुड़ाने पहुंचे गोपाल और सुमित अग्रवाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।
इस मामले में पूर्ति निरीक्षक खेरागढ़ अमरनाथ मौर्य की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। गोपाल उर्फ हेमेंद्र के विरुद्ध विभिन्न थानों में आधा दर्जन से अधिक केस दर्ज हैं। डीसीपी पश्चिमी जोन सोनम कुमार ने बताया कि आरोपी सुमित अग्रवाल, गोपाल उर्फ हेमेंद्र व सईद को जेल भेजा गया है। मामले में वांछित राशन माफिया झब्बू की गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।
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क्या है बीएनएस की धारा 111 (2) (बी)
अधिवक्ता अनूप शर्मा के मुताबिक, भारतीय न्याय संहिता बीएनएस की धारा 111 (2) (बी) संगठित अपराध से निपटने के लिए है। जिसमें एक ही आशय के लोगों का सिंडिकेट बनाकर वित्तीय या भौतिक लाभ के लिए कार्य करना है। जिसमें कम से कम 10 वर्ष एवं आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। इस धारा में केस दर्ज होने पर आरोपी की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान भी है, यदि उसने आपराधिक कृत्यों से संपत्ति अर्जित की हो।