19एमएनपी-14-कलक्ट्रेट स्थित जिला पंचायत कार्यालय
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मैनपुरी। विकास खंड बरनाहल की ग्राम पंचायत नवाटेढ़ा में हुए लाखों के घोटाले में प्रधान और सचिव पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। अंतिम जांच रिपोर्ट में भी दोषी पाए जाने पर प्रशासन ने ये कदम उठाया है। एक शिकायत पर हुई जांच में दो सदस्यीय समिति ने ग्राम पंचायत नवाटेढ़ा में लाखों के फर्जीवाड़े की पुष्टि की थी। जांच रिपोर्ट के अुनसार प्रधान ज्ञान देवी और तत्कालीन सचिव रतन सिंह ने मिलकर 7.91 लाख रुपये का फर्जी भुगतान किया गया। इसमें नाली निर्माण, पंचायत घर मरम्मत, खड़ंजा निर्माण आदि कार्य शामिल थे। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर नवंबर 2019 में प्रधान के अधिकारी सीज कर जिला कार्यक्रम अधिकारी का अंतिम जांच सौंपी गई थी। जांच अधिकारी ने इसी सप्ताह अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी। इसमें उन्होंने 9.22 लाख के फर्जीवाड़े की पुष्टि की। इसी के आधार पर एडीओ पंचायत राजेश दुबे ने दोनों के विरुद्घ थाना बरनाहल में एफआईआर दर्ज कराई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद ग्राम पंचायत में खलबली मच गई है। वहीं प्रधान और सचिव से आधी-आधी धनराशि की रिकवरी का भी आदेश जारी किया गया है।
फाइनल जांच में बढ़ गई फर्जीवाड़े की धनराशि
बीते वर्ष जुलाई में नवाटेढ़ा निवासी वीर बहादुर सिंह ने प्रभारी मंत्री गिरीश चंद्र यादव से ग्राम पंचायत में घोटाले की शिकायत की थी। प्रभारी मंत्री की संस्तुति पर तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी कपिल सिंह ने दो अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर शिकायत के बिंदुओं पर जांच के आदेश दिए थे। जांच अ धिकारी आचार्य ग्राम्य विकास संस्थान धीरेंद्र कुमार और भूमि संरक्षण अधिकारी विजय सिंह की जांच में ग्राम पंचायत में वर्ष 2016-17 में 7.91 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया। वहीं फाइनल जांच में जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद कुमार ने 9.22 लाख के घोटाले की रिपोर्ट दी है।
समिति ही करेगी विकास कार्यों का संचालन
बीते वर्ष तीन सदस्यीय समिति में प्रधान को दोषी पाए जाने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी प्रमोद कुमार उपाध्याय ने प्रधान के अधिकार सीज कर दिए थे। इसके बाद बाद तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। इसमें पंचायत सदस्य शकुंतला देवी, वीरेंद्र सिंह और दिनेश कुमार को शामिल किया गया है। तब से समिति ही यहां विकास कार्यों का संचालन कर रही है।
पूर्व से ही ग्राम पंचायत में समिति गठित चल रही है। इसके बाद हुई अंतिम जांच में भी प्रधान और सचिव दोषी पाए गए हैं। पंचायत राज विभाग की ओर से मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई है। - नगेंद्र शर्मा, मुख्यविकास अधिकारी।