सैंया के गांव वीरई निवासी नरेंद्र कुशवाह अपने बड़े भाई धीरज के साथ टेंपो से आगरा आकर घर-घर दूध बेचते हैं। टेंपो धीरज चलाते हैं। नरेंद्र को टेंपो चलाना नहीं आता है। घटना वाले दिन जीवनी मंडी क्षेत्र के गरीब नगर में दूध देने आए नरेंद्र टेंपो में बैठे हुए थे। तभी चाैकी प्रभारी जीवनी मंडी रविंद्र कुमार पुलिसकर्मियों के साथ झगड़े की सूचना पर पहुंचे। वह कुछ युवकों को पकड़कर ले जा रहे थे। उन्होंने नरेंद्र से टेंपो लेकर चलने के लिए कहा। आरोप है कि मना करने पर नरेंद्र को जबरन चाैकी पर ले जाकर पुलिसकर्मियों ने पीटा था। साथ ही शांतिभंग में चालान कर दिया था।
जमानत मिलने के बाद नरेंद्र ने अपने रिश्तेदार भाजपा नेता राकेश कुशवाह के माध्यम से डीसीपी सिटी से शिकायत की। मामले में चाैकी प्रभारी रविंद्र कुमार को निलंबित करते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए गए थे। वहीं, सपा नेताओं ने प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद थाना छत्ता के प्रभारी निरीक्षक को भी हटाया गया था।
मामले की शिकायत आगरा आए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद माैर्य से भी की गई थी। इसके बाद 16 जनवरी को आरोपी पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें पिटाई और गलत तरीके से रोककर रखने की धारा लगाई गई है। इसमें तत्कालीन चाैकी प्रभारी रविंद्र कुमार, पुलिसकर्मी राजबिहारी, संजय और सनीपाल को नामजद किया गया है। एसीपी छत्ता शेषमणि उपाध्याय ने बताया कि मामले में साक्ष्य संकलन कर कार्रवाई की जाएगी।
पिता ने दी थी तहरीर
घटना के बाद नरेंद्र के पिता ओमवीर ने तहरीर दी थी। उन्होंने अपने शिकायती पत्र में लिखा था कि नरेंद्र को अवैध हिरासत में रखकर अमानवीय व्यवहार किया गया। बिना वैध प्रक्रिया के प्रताड़ित किया गया। पैर का नाखून उखाड़ दिया। यह भारतीय संविधान, मानवाधिकार और कानून के मूल सिद्धांत का घोर उल्लंघन है। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट में नाखून पर लगी चोट पुरानी होने की बात सामने आई थी।