आगरा। थाना न्यू आगरा में अपने ही थाने के पूर्व थानाध्यक्ष और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह कार्रवाई एक व्यक्ति पर गुंडा एक्ट का फर्जी मामला दर्ज करने की रिपोर्ट देने के आरोप में की गई है। पीड़ित ने जेल से रिहा होने के बाद आरटीआई से जानकारी मांगी, जिसमें उसके खिलाफ ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं पाया गया। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।
दयालबाग के नगला तल्फी निवासी प्रेम सिंह (48) ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव के भीकम सिंह और थाना न्यू आगरा पुलिस ने उनके खिलाफ गुंडा एक्ट का फर्जी मामला दर्ज होने की रिपोर्ट दी। इस कारण उन्हें अकारण लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। प्रेम सिंह ने बताया कि उन्होंने 3 अगस्त, 2018 को जिलाधिकारी आगरा को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत दी थी।
जब प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची, तो दूसरे पक्ष ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। इस मामले में उनके भाई ने थाना न्यू आगरा में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जो न्यायालय में विचाराधीन है। समझौते का दबाव बनाने के लिए भीकम सिंह ने अपने पुत्र रंजीत के माध्यम से 11 मई, 2022 को थाना ताजगंज में लूट का मामला दर्ज कराया। प्रेम सिंह को गिरफ्तार कर 7 सितंबर, 2023 को जेल भेजा गया था। जमानत सुनवाई के दौरान पुलिस और आरोपी ने उच्च न्यायालय में गलत शपथपत्र दाखिल कर प्रेम सिंह के खिलाफ वर्ष 2009 का गुंडा एक्ट का मुकदमा दर्शाया।
जमीनी विवाद से जुड़ा मामला
प्रेम सिंह का आरोप है कि यह पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा है। उन्होंने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को हटाने के लिए शिकायत की थी। इसी विवाद में दूसरे पक्ष ने उन पर हमला किया था। बाद में, इसी मामले में समझौते का दबाव बनाने के लिए उन पर लूट का फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया। गुंडा एक्ट की फर्जी रिपोर्ट भी इसी साजिश का हिस्सा थी। थानाध्यक्ष ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर भीकम सिंह समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। जांच की जा रही है।