कासगंज हिंसा में मारे गए चंदन गुप्ता के घर शोक के माहौल में दोपहर 12 बजे अचानक आक्रोश फूट गया। सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा घोषित आर्थिक सहायता राशि का चेक लेकर विधायकों के साथ डीएम, एसपी उनके घर देने पहुंचे थे।
चंदन के परिवारीजन शासन की तरफ से भेजी गई आर्थिक सहायता को लेने से इंकार करने लगे। परिवारीजनों एवं माता, पिता ने कहा कि चंदन को शहीद का दर्जा दिया जाए।
उन्हें आर्थिक सहायता की जरूरत नहीं है। परिवारीजनों ने कहा कि सीएम योगी खुद आकर यहां चेक दें और उनकी मांगे पूरी करें। हालांकि बाद में वे लोग मान गए।
विधायक सदर देवेंद्र राजपूत, विधायक अमांपुर देवेंद्र प्रताप, जिलाधिकारी आरपी सिंह, पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सिंह अन्य प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ चंदन के आवास पर पहुंचे।
जिलाधिकारी ने 20 लाख की आर्थिक सहायता के चेक देने की पेशकश की तभी मां संगीता गुप्ता, पिता सुशील, बहन कीर्ति व अन्य परिवारीजनों ने आक्रोश जताया। चंदन के समर्थन में नारेबाजी होने लगी।
अधिकारियों और विधायकों से आर्थिक सहायता को वापस ले जाने के लिए कहा गया। परिवारीजनों ने कहा कि रुपयों से उनके बेटे की क्षति की भरपाई नहीं हो सकती। चंदन को शहीद का दर्जा मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री स्वयं यहां आएं।
करते रहे शहीद का दर्जा देने की मांग
भाजपा नेताओं एवं लोगों ने परिवारीजनों को काफी समझाने की कोशिश की, लेकिन परिवारीजन चेक स्वीकार करने को राजी नहीं थे। मां बार बार चंदन को पुकारती हुई शहीद घोषित करने की मांग करती नजर आईं। इस दौरान वह कई बारी बेहोश भी हो गई।
मंजर काफी द्रवित करने वाला था। जिलाधिकारी ने परिवारीजनों को भरोसा दिया कि चंदन को शहीद का दर्जा देंने के संबंध में मांगों को शासन को भेजेंगे।
बाद में परिवारीजनों को 20 लाख का चेक दिया। इसी के साथ परिवारीजनों ने चेतावनी भी दी यदि चंदन को शहीद का दर्जा नहीं मिला तो परिवार के लोग धरना प्रदर्शन करेंगे।