निर्माणाधीन आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों को भविष्य में आपात स्थिति के दौरान भारतीय वायुसेना रोड रनवे के रूप में प्रयोग करना चाहती है। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार से समझौता हो चुका है। मगर इससे पहले गुरुवार को यमुना एक्सप्रेसवे पर लड़ाकू विमान की लैंडिंग के ट्रायल ने इतिहास रच दिया।
दरअसल, खूबियों के मामले में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे लगभग यमुना एक्सप्रेसवे जैसा ही होगा। यह एक्सप्रेसवे भी जमीन से काफी ऊंचा होगा। छह लेन के इस एक्सप्रेसवे पर भी बैरिकेडिंग होगी। इसके अलावा कम से कम अवरोधक होंगे। हालांकि दोनों में जो बुनियादी अंतर होगा, वह यह है कि लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे में डामर का प्रयोग अधिक होगा, जबकि यमुना एक्सप्रेसवे सीमेंटेड है। बहुत कम जगह डामर का प्रयोग हुआ है। समझौते के तहत लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर कई जगह तीन-तीन किलोमीटर का हिस्सा रोड रनवे के हिसाब से तैयार किया जाएगा।
15 साल आगे है पाकिस्तान
अपने देश में भले ही रोड रनवे का पहला प्रयोग अब हुआ हो, लेकिन पाकिस्तान पिछले 15 साल से कर रहा है। वहां वर्ष 2000 में लाहौर मोटरवे पर कई लड़ाकू विमानों की लैंडिंग कराई जा चुकी है। इसके बाद भी कई बार ऐसा प्रयोग हो चुका है। चीन, पोलैंड, स्वीडन, जर्मन, सिंगापुर में रोड रनवे हैं।