एटा के किसान सरसों और आलू बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। इनकी बुवाई के लिए डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) की जरूरत है। खाद लेने के लिए किसान सहकारी केंद्रों पर सुबह से ही लाइन में लग जाते हैं। करीब 7 घंटे बाद डीएपी की बोरी उपलब्ध हो पा रही है। किसानों को खाद के साथ 240 रुपये कीमत की नैनो यूरिया की बोतल जबरन थमाई जा रही है।
किसानों कहना है कि एक से तीन बोरी डीएपी खरीदने पर नैनो यूरिया की एक बोतल दी जा रही है। इसकी कीमत करीब 240 रुपये हैं। इससे किसान परेशान हैं। किसानों ने विरोध किया इसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। किसानों के विरोध पर कर्मचारी भड़क गए। इससे खाद वितरण बंद कर दिया गया। इसके बाद किसान मायूस हो गए। इन्हें मजबूरी में डीएपी के साथ नैनो यूरिया भी लेनी पड़ी।
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सबलपुर के किसान विकास कुमार ने बताया कि सहकारी केंद्र पर डीएपी की बोरी लेने के लिए सुबह पांच बजे लाइन में लग गए थे। सात घंटे बाद डीएपी का नंबर आया। वहीं हरिश्चंदपुर के रहने वाले किसान रिंकू ने बताया कि डीएपी की बोरी के साथ जबरन कृषि में उपयोग होने वाला अन्य सामान दिया जा रहा है। इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अगर किसान सामान नहीं ले रहे हैं तो डीएपी भी नहीं दी जा रही है।