सिर पर बंधा पुराना साफा। बदन पर मैली फटी शर्ट और काला पुराना पेंट। पांव में टूटी चप्पलें। लाचार चेहरा और पथराई आंखें। ये वेशभूषा है रेवती प्रसाद की, जिनका सबसे छोटा बेटा गजेंद्र प्रतिमा विसर्जन के दौरान उटंगन नदी में डूब गया। उसकी तलाश में बेबस पिता रोज डूंगरवाला गांव में उस मरघट में आते हैं, जहां डूबे लोगों की तलाश में पांच दिन से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
नदी के किनारे मरघट के पास से गुजरते हुए कुसियापुर निवासी रेवती प्रसाद (55) ने अमर उजाला संवाददाता से पूछा... बाबू जी। हमाए गजेंद्र को कछु पतो चलो.... पांच दिना है गए। बाकी मां की तबियत भौत खराब है। बीमार है गई है। पांच दिना तै घर में चूल्हो नाय जलो। मेरो सबते छोटा लड़का गजेंद्र माताये सिरायवे आयो। दोस्त वाय घर ते बुला लाए। रुंधे हुए गले से रेवती ने कहा पता नाय चल रयो का भयो... कोई बाकी लाशई माय दिव वाये देवे। कैसेऊ मेरी छाती तो सिराय जावे।
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आंखों से आंसू छलके और कुछ देर बाद खुद को संभालते हुए रेवती बोले कि उनके पास तीन बीघा जमीन है। खेती-बाड़ी से परिवार पलता है। तीन बेेटे और तीन बेटियां हैं। दो बेटी और एक बेटे की शादी हो गई। गजेंद्र सबसे छोटा था। जनता इंटर कॉलेज में 12 वीं का छात्र था। रेवती ने बताया कि वह लोधी राजपूत है। जितने लोग डूबे, वह सभी एक ही समुदाय से थे। रेवती की तरह ही बाकी युवकों के पिता और परिजन उटंगन नदी के किनारे पांच दिन से खड़े हैं और एक एक पल उनके लिए सदियों के इंतजार जैसा हो गया है।
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महामृत्युंजय मंत्र का जाप शुरू
खेरागढ़ नगर पंचायत चेयरमैन सुधीर गर्ग ने बताया कि बचाव अभियान में तमाम बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञ टीम होने के बावजूद डूबे लोग बमुश्किल निकल पा रहे हैं। सेना के स्कूबा डाइवर्स भी कार्य करने में चुनाैती का सामना कर रहे हैं। वह अपना अभियान पूरा कर पाएं इसलिए प्रार्थना भी शुरू हो गई। वहीं खेरागढ़ के गुफा मंदिर में महामृत्युंजय मंत्र का जाप पंडित जयंती शर्मा के नेतृत्व में किया जा रहा है। यह तब तब जारी रहेगा, जब तक तलाशी अभियान पूरा नहीं हो जाता।