आगरा। पिता-पुत्र ने पुलिस लाइन में तैनात हेड कांस्टेबल संदीप विमल को एकता थाना क्षेत्र में प्लाॅट दिखाया। इसके बाद बैनाम कर 33 लाख की धोखाधड़ी की। निर्माण के लिए बैंक से लोन लेने के लिए जब हेड कांस्टेबल ने सदर तहसील में दाखिला खारिज करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया तो उन्हें इसकी जानकारी हुई। एकता थाने में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित संदीप विमल हापुड़ जिले के निवासी हैं और वर्तमान में कमिश्नरेट में पुलिस लाइन में हेड कांस्टेबल हैं। उन्होंने बताया कि वह प्लाॅट खरीदना चाहते थे। इसी दौरान मलपुरा के कबूलपुर निवासी ज्ञान सिंह और उनका पुत्र अनिल उनके संपर्क में आया। दोनों ने एकता थाना क्षेत्र में अपना एक प्लाॅट दिखाया और सभी दस्तावेज ठीक होने का हवाला दिया। 33 लाख में सौदा तय होने के बाद उन्होंने आरटीजीएस के माध्यम से 10 लाख रुपये और 23 लाख रुपये के चेक के माध्यम से दिए। 20 अगस्त 2025 को आरोपियों ने तहसील सदर में जमीन का बैनामा कर दिया।
बैनामा के बाद जब वह बैंक लोन के लिए दाखिल-खारिज कराने तहसील पहुंचे तो जानकारी मिली कि इस प्लॉट का 2012 में ही सोनू कुमार अग्रवाल के नाम 10 लाख रुपये लेकर रजिस्टर्ड एग्रीमेंट किया जा चुका है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसके अलावा प्लॉट पर एक अन्य व्यक्ति से नोटरी एग्रीमेंट कर पांच लाख रुपये लेने की भी जानकारी हुई।
हेड कांस्टेबल का आरोप है कि पिता-पुत्र ने दाखिल-खारिज में उनके जाली हस्ताक्षर कर फर्जी समझौतापत्र लगा दिया। विरोध पर जान से मारने की धमकी दी। एसीपी ताज सुरक्षा पियुष कांत राय ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।