किसान दिवस: बाह में यूरिया के लिए जूझते किसान
बाह। यमुना, चंबल और उटंगन के बीहड़ से घिरी बाह तहसील के 214 गांवों में खेती अब आसान नहीं रही। खेतों में आलू, सरसों, गेहूं की फसल की पहरेदारी ने रात की नींद छीन ली है, बावजूद इसके छुट्टा मवेशी फसल नष्ट कर रहे हैं। खाद के लिए कई-कई दिन घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। वहीं, बाजरे की उपज बेचने में भी पसीना छूट रहा है।
किसान दिवस की पूर्व बेला पर बाह क्षेत्र के खरीद केंद्र पर बाजरा बेचने को डटे किसानों एवं यूरिया के लिए लाइन में लगे किसानों की तस्वीरें उनकी वेदना को बताने के लिए काफी हैं। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के तहसील अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौहान कहते हैं कि आज कल किसान के लिए खेती किसी तपस्या से कम नहीं है। भारतीय किसान यूनियन (सर्वोदय) के जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह चौहान ने बताया कि किसान अपनी फसल को बचाने के लिए तपस्वी बन कर रह गया है। कड़ाके की सर्दी में रात छुट्टा मवेशी को भगाने में बीत जाती है। दिन में यूरिया के लिए लाइन में लगते हैं, बाजरा बेचने के लिए भी खरीद केंद्रों पर कई कई दिन चक्कर काटने पड़ रहे हैं। किसानों की समस्या को अधिकारियों के सामने कई बार उठाया है, लेकिन हालात नहीं सुधरे हैं।