दूध शहर में नहीं जा रहा, गांव में मोल नहीं मिल रहा। सब्जियों की हालत और खराब है, बिक्री न हो पाने से खेतों में ही सड़ रही हैं। दर्द इस बात भी है कि अफसर न हमारी समस्या सुन रहे हैं और न ही समाधान के लिए सुझाव ले रहे हैं। यह कहना है कि किसान संगठनों का। उनका कहना है कि जैसे अन्य संगठनों के साथ प्रशासन लॉकडाउन पर वार्ता कर रहा है, वैसे ही उन्हें भी समय दिया जाए।
भारतीय किसान संघ के प्रांत अध्यक्ष मोहन सिंह चाहर ने कहा कि लॉकडाउन में व्यापारी, उद्यमी, समाजसेवी व अन्य संगठनों के साथ प्रशासन ने बैठक की। उन्हें राहत भी दी, इसमें कुछ गलत नहीं है, लेकिन किसानों की लगातार उपेक्षा हो रही है, यह सही नहीं।
दो माह से प्रशासन ने किसानों के साथ न कोई बैठक की, न उनकी समस्याएं सुनी गईं। सब्जियां, फल-फूल व अन्य फसलें मार्केट नहीं पहुंच पा रहीं हैं। सब्जियां खेतों में सड़ रही हैं। किसान नगदी संकट से जूझ रहे हैं। किसान संघ ने डीएम से जल्द किसानों संगठनों की बैठक बुलाने की मांग की है।