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लॉकडाउनः किसानों की भी सुन लो सरकार! सड़ रहीं सब्जियां, अन्नदाता परेशान

Tue, 26 May 2020 12:46 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

दूध शहर में न जाने के पशुपालकों के सामने भी आर्थिक संकट
 
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सब्जियां (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दूध शहर में नहीं जा रहा, गांव में मोल नहीं मिल रहा। सब्जियों की हालत और खराब है, बिक्री न हो पाने से खेतों में ही सड़ रही हैं। दर्द इस बात भी है कि अफसर न हमारी समस्या सुन रहे हैं और न ही समाधान के लिए सुझाव ले रहे हैं। यह कहना है कि किसान संगठनों का। उनका कहना है कि जैसे अन्य संगठनों के साथ प्रशासन लॉकडाउन पर वार्ता कर रहा है, वैसे ही उन्हें भी समय दिया जाए।
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भारतीय किसान संघ के प्रांत अध्यक्ष मोहन सिंह चाहर ने कहा कि लॉकडाउन में व्यापारी, उद्यमी, समाजसेवी व अन्य संगठनों के साथ प्रशासन ने बैठक की। उन्हें राहत भी दी, इसमें कुछ गलत नहीं है, लेकिन किसानों की लगातार उपेक्षा हो रही है, यह सही नहीं।

दो माह से प्रशासन ने किसानों के साथ न कोई बैठक की, न उनकी समस्याएं सुनी गईं। सब्जियां, फल-फूल व अन्य फसलें मार्केट नहीं पहुंच पा रहीं हैं। सब्जियां खेतों में सड़ रही हैं। किसान नगदी संकट से जूझ रहे हैं। किसान संघ ने डीएम से जल्द किसानों संगठनों की बैठक बुलाने की मांग की है।
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नहीं मिल रहा वारदाना
राज्य किसान सलाहकार समिति के सदस्य बंगाली बाबू अरेला ने कहा कि गेहूं खरीद केंद्रों पर किसानों को वारदाना तक नहीं मिल रहा। लॉकडाउन में किसान बर्बादी के कगार पर आ गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर किसानों को आर्थिक राहत दिलाने की मांग की है।

दुग्ध उत्पादक  भी संकट में
किसान नेता सोमवीर यादव ने कहा है कि दुग्ध उत्पादक बड़े संकट में है। दूध बिक नहीं रहा, जबकि पशुओं के चारे आदि का खर्च ज्यों का त्यों है। बैंकों ने ऋण माफ नहीं किए हैं। ऐसे में पशुपालक क्या करें। उनका कहना है कि प्रशासन को उनका दर्द सुनना चाहिए और कोई हल निकालना चाहिए।
 
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