शमसाबाद में आलू सड़ने से किसान सदमे में बैठा हुआ
शमसाबाद। क्षेत्र के ग्राम चितौरा में आलू की मंदी और व्यवस्थाओं की कमी ने एक किसान को बर्बादी की कगार पर खड़ा कर दिया है। उचित दाम न मिलने और शीतगृहों में जगह न होने के कारण खेत में डंप किया गया करीब 700 पैकेट आलू सड़ गया। अपनी साल भर की मेहनत को मिट्टी में मिलते देख पीड़ित किसान गहरे सदमे में है।
चितौरा निवासी किसान भूरी सिंह रामबाबू ने इस उम्मीद में आलू की फसल बोई थी कि इससे परिवार का गुजारा होगा। लेकिन खुदाई के समय बाजार में आलू के दाम इतने गिर गए कि कोई व्यापारी खरीदने को तैयार नहीं था। किसान का कहना है कि यदि वह मंडी आलू भेजता, तो भाड़े और वारदाने (बोरे) का खर्च भी निकलना मुश्किल था। वहीं, क्षेत्र के शीतगृहों पर हाउसफुल के बोर्ड लटके होने के कारण उन्हें वहां भी जगह नहीं मिली। मजबूरन किसान ने लगभग 700 पैकेट आलू को पेड़ों की छांव में डंप कर दिया, ताकि भाव बढ़ने पर उसे बेचा जा सके। लेकिन मौसम की मार और गर्मी के चलते डंप में लगा आलू सड़ने लगा। जब आलू से दुर्गंध आने लगी, तो किसान ने भारी मन से ट्रैक्टर की सहायता से उसे खेतों में ही फिंकवा दिया। आंखों के सामने अपनी फसल को कचरा बनते देख किसान भूरी सिंह सदमे में हैं।