जमीन हमारी मां है। हमारे साथ छल हुआ है। हमें मरना मंजूर है। डरा-धमकाकर एक इंच जमीन नहीं लेने देंगे। ये एलान रविवार को एत्मादपुर मदरा में महापंचायत में हुआ। जहां भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों ने जमीन वापसी की मांग करते हुए आर-पार की लड़ाई का एलान किया है।
इनर रिंग रोड लैंड पार्सल योजना के तहत एडीए ने 2010-11 में 900 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की थी। जिसमें रहनकला, रायपुर, एत्मादपुर मदरा और बुढ़ाना गांव भू अधिग्रहण प्रभावित किसानों को करीब 600 हैक्टेयर भूमि का मुआवजा नहीं मिला।
500 करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा राशि वितरित होनी है। फिलहाल, एडीए 14 साल बाद एत्मादपुर मदरा की भूमि का मुआवजा बांट रहा है। जिसका किसान विरोध कर रहे हैं। रविवार को एत्मादपुर मदरा में किसानों की महापंचायत हुई।
जहां राजवीर सिंह, नोहबत सिंह, भूरी सिंह, सुरेंद्र कुमार और श्याम सिंह ने कहा कि एडीए और प्रशासन हमारी जमीन पर निगाह न डाले। डरा-धमकाकर हमारी जमीन कोई नहीं ले सकता। मामला, हाईकोर्ट में विचाराधीन है। जब तक हाईकोर्ट से कोई निर्णय न हो जाए। तब तक किसानों का उत्पीड़न न किया जाए। किसान नेता सोमवीर यादव ने कहा कि 14 साल तक एडीए ने मुआवजा नहीं दिया। अब जमीन की कीमत 2 से 2.50 करोड़ रुपया बीघा है। एडीए 30 लाख रुपया बीघा दे रहा है। नए भूअधिग्रहण कानून में सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा का प्रावधान है।
किसान एडीए को जमीन नहीं देना चाहते। एडीए और प्रशासन हमें डरा और धमका रहा है। किसान सुजान सिंह और धनपाल सिंह ने कहा कि भू अधिग्रहण के बाद अगर पांच साल में कोई योजना लागू नहीं होती तो जमीन वापसी का नियम है। एडीए इस नियम को नहीं मान रहा। जिससे किसानों में आक्रोश है। इस संबंध में एडीए उपाध्यक्ष अनीता यादव का कहना है कि जमीन वापस नहीं होगी। जो तय हुआ है उस तरह आगे की कार्रवाई की जाएगी।