आगरा के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट समेत 10 सूत्रीय मांगों के लिए दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम कार्यालय पहुंचे किसानों से प्रबंध निदेशक मिलने नहीं आए। इस पर किसान भड़क गए और नारेबाजी की। सुरक्षा गार्ड के रोकने पर किसानों की उससे बहस हो गई। हंगामा करते हुए किसान धरने पर बैठ गए। पुलिस ने किसानों को शांत कराया। तब प्रबंध निदेशक आए और वार्ता कर ज्ञापन लिया।
भारतीय किसान यूनियन के राजवीर लवानियां ने बताया कि मंडल अध्यक्ष गजेंद्र सिंह परिहार, राष्ट्रीय महासचिव राजपाल शर्मा और प्रदेश उपाध्यक्ष बुद्धा सिंह के साथ करीब एक बजे किसानों के साथ ज्ञापन देने कार्यालय पहुंचे थे। पार्किंग में सुरक्षा गार्ड ने वाहन खड़ा करने नहीं दिया। बहस करने पर वे लोग वाहन वहीं खड़े कर अंदर चले गए। अंदर गए तो गार्ड ने कहा कि प्रबंध निदेशक अमित किशोर वीडियो कांफ्रेंस में व्यस्त हैं। काफी देर इंतजार करने पर भी प्रबंध निदेशक नहीं आए, इस पर किसानों ने नारेबाजी शुरू कर दी।
उन्होंने बताया कि गार्ड अभद्रता करने लगे, इस पर हंगामा करते हुए किसान धरने पर बैठ गए। पता चलने पर पुलिस आई और किसानों को शांत कराया। किसान बोले, जब तक प्रबंध निदेशक ज्ञापन नहीं लेंगे, धरना जारी रहेगा। इस पर पुलिस ने प्रबंध निदेशक से बात की और वे बाहर आए। किसानों को समझाते हुए अंदर ले गए। ज्ञापन लेकर समस्या के समाधान की बात कही। घंटे भर प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शन में रनवीर सिंह चाहर, सुखपाल सिंह, धर्मवीर सिंह, जगदीश परिहार, किशनवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
ये हैं मुख्य मांगें: गांव में कम से कम 10 घंटे बिजली दी जाए, गर्मी में लोड के कारण ट्रांसफार्मर खराब हो रहे हैं, इनकी क्षमता बढ़ाई जाए। निजी नलकूपों की लाइनों की मरम्मत हो, ठेकेदार घटिया कार्य कर रहे हैं, इसकी निगरानी कर जांच कराई जाए। प्राथमिक विद्यालय और खेतों के ऊपर से गुजरी जर्जर लाइनें ठीक कराएं। किसानों पर कैपेसिटर चार्ज का समाधान विभागीय स्तर पर किया जाए। परिवर्तकों की क्षमता वृद्धि भी की जाए।
ये कहा प्रबंध निदेशक ने
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अमित किशोर ने बताया कि किसान यूनियन का प्रतिनिधमंडल मिला था। ट्यूबवेल पर जर्जर तार व कम वोल्टेज आदि समस्या बताई है। समाधान कराया जाएगा।