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एमएसपी से कम कीमत पर बिक रहा बाजरा, मक्का और धान

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कासगंज गल्ला मंडी में अपनी उपज लेकर पहुंचे किसान - फोटो : KASGANJ
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कासगंज। सरकार द्वारा घोषित एमएसपी से काफी कम कीमत पर मक्का, बाजरा और धान की फसल की बिक्री हो रही है। इन दामों पर किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। इससे किसान बेहद आहत है।
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इस समय गल्ला मंडी में मक्का, बाजरा, धान, अरहर, सरसों आदि फसलों की आवक चल रही है। सबसे कम कीमत पर मंडी में बाजरा की बिक्री हो रही है। बाजरा का एमएसपी 2150 रुपये है। हालांकि इसकी बिक्री 1300 रुपये तक में हो रही है। यही स्थिति मक्का की है। मक्का का एमएसपी 1850 रुपये है और इसकी बिक्री 1400 रुपये प्रति क्विंटल की जा रही है। अरहर की एमएसपी 6000 रुपये प्रति क्विंटल है और मंडी में यह 5200 रुपये के भाव पर बिक रही है। गेहूं की एमएसपी 1975 है और यह 1590 रुपये के भाव पर बिक रही है।
जौ भी 1600 रुपये एमएसपी की तुलना में 1500 और धान 1888 रुपये प्रति क्विंटल की तुलना में 1300 रुपये है। वर्तमान में मंडी में मूंग और उड़द की कीमत एमएसपी से अधिक है, लेकिन किसानों के पास ये दोनों ही उत्पाद नहीं हैं। कुछ किसानों के पास बहुत कम मात्रा में ये दोनों उत्पाद हैं। इसके अतिरिक्त सरसों की बिक्री भी एमएसपी से अधिक कीमत पर हो रही है। सरसों की एमएसपी 4650 रुपये प्रति क्विंटल है और इसकी बिक्री 5200 रुपये प्रति क्विंटल में हो रही है।
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हर जिंस की सरकार नहीं करती खरीद
सरकार द्वारा कई तरह के कृषि उत्पादों की एमएसपी घोषित की जाती है। हालांकि सरकार केवल गेहूं, धान, मक्का की खरीद ही करती है। शेष जिंसों का बाजार मूल्य ही किसानों को मिल पाता है। यदि सरकार सभी जिंसों की खरीद करे तो किसानों को एमएसपी मिल सके। करीब 20 फसलों की एमएसपी सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है।
क्या बोले किसान-
- बाजरा का बाजार भाव काफी कम है। फसल की कीमत भी नहीं निकल पा रही है। ऐसे में किसान कैसे अपना जीवनयापन कर सकता है? कुछ समझ में नहीं आ पा रहा। एमएसपी के निर्धारण का भी कोई औचित्य नहीं है, जब निर्धारित मूल्य पर फसल की बिक्री न हो। -होरीलाल, भैंसोरा
- सरकार फसलों की एमएसपी घोषित कर औपचारिकता कर लेती है, लेकिन सरकार कभी यह नहीं देखती कि किसानों को यह मूल्य मिल रहा है अथवा नहीं। धान की एमएसपी सरकार ने घोषित कर दी, लेकिन सभी प्रजाति के धान खरीदने की व्यवस्था नहीं बनाई। सभी फसलों के साथ यही आलम रहता है।
- नारायन सिंह, नगला पोपी।
- सरकार ने मक्का की खरीद बहुत कम मात्रा में की। जिले में तैयार होने वाली उपज पूरी नहीं खरीदी गई। मंडी में कम कीमत पर मक्का बिक रहा है। अब पिछले वर्ष मक्का 2000 रुपये क्विंटल के भाव पर बिकी थी।
- नन्हेलाल, नगला बिदारी।
- किसानों को न तो अपनी उपज के मूल्य के निर्धारण का हक है और न ही सरकारी एमएसपी किसानों को मिल पा रही है। किसान की मजबूरी है कि बाजार भाव पर उसे अपनी उपज बेचनी पड़ती है। किसानों की मांग जायज हैं। सरकार किसानों की मांगाें को माने। राजेंद्र नगला, बिदारी।
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