आगरा के बीएसए दफ्तर में आठ अक्तूबर को आग लगाए जाने के मामले में डेढ़ महीने की जांच के बाद पुलिस इस नतीजे पर पहुंची है कि इस प्रकरण के पीछे उन शिक्षकों का हाथ हो सकता है जिनकी नौकरी जाने वाली थी।
इनकी बीएड की डिग्री फर्जी हैं। साथ ही एक लिपिक की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। जिन शिक्षकों का रिकार्ड जला है, उनकी बुधवार को सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद इनसे पूछताछ होगी। लिपिक का नाम भी सूची में शामिल हो सकता है।
फील्ड यूनिट की टीम ने दी थी यह रिपोर्ट
फील्ड यूनिट की टीम ने वारदात के आठवें दिन यह रिपोर्ट दे दी थी कि आग बाहर से लगाई गई है। सिर्फ दो ही जगह आग लगी थी। इन दोनों जगह फर्जी डिग्री वाले शिक्षकों की फाइलें रखी थीं। इनकी कुल संख्या 241 है। इनकी बर्खास्तगी की तैयारी चल रही थी।