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Agra News: मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायतों का फर्जी निस्तारण

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- फीड बैक में खुल रही पोल, दिसंबर की रैंकिंग में गिरावट, तहसीलदार से लेकर बीएसए तक लापरवाह
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माई सिटी रिपोर्टर
आगरा। जनसुनवाई का हाल देखिए। मुख्यमंत्री से मिलकर शिकायत करिए या सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर। निस्तारण में फर्जीवाड़ा हो रहा है। यह हम नहीं, जन शिकायतों के निस्तारण की फीडबैक रिपोर्ट कह रही है। लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई नहीं होने से जन शिकायतों का संतोषजनक हल नहीं निकल रहा। मुख्यमंत्री की नाराजगी का भी अफसरों को डर नहीं।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर अक्तूबर में 27 मामले आए। नवंबर में 54 शिकायत आईं। इनके अलावा कई मामले ऐसे थे, जिनमें फरियादियों ने मुख्यमंत्री से मिलने के लिए गोरखपुर और लखनऊ तक दौड़ लगाई। उन संदर्भों को लेकर भी आगरा के अफसर लापरवाह हैं। सबसे ज्यादा लापरवाह तहसीलदार निकले, जो राजस्व विभाग से संबंधित शिकायतों के निस्तारण के प्रति गंभीर नहीं। फर्जी आख्याएं लगाई। इन्हें लेकर डीएम ने चार तहसीलदारों का पिछले माह वेतन रोका, जिनमें तहसीलदार खेरागढ़, किरावली व एत्मादपुर शामिल हैं। सीएम पोर्टल पर की गई शिकायतों में 60 प्रतिशत राजस्व से संबंधित हैं। इनमें लेखपाल, कानूनगो, नायब तहसीलदार व तहसीलदार से लेकर एसडीएम तक की लापरवाही सामने आई। दो तहसीलदारों के वेतन पर दो महीने से रोक लगी है। फिर भी हालात नहीं सुधर रहे। अब फतेहाबाद तहसीलदार का वेतन रोकने के आदेश डीएम ने दिए हैं।
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सीएम तक 60 प्रतिशत शिकायतें राजस्व की
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल व व्यक्तिगत रूप से पेश होकर दर्ज होने वाली शिकायतों में 60 प्रतिशत शिकायतें तहसीलों से संबंधित हैं। इनमें एसडीएम, तहसीलदार की लापरवाही का जिक्र है। 40 प्रतिशत में नगर निगम, बिजली, प्राधिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग शामिल हैं। सीएमओ और बीएसए स्तर से शिकायतों के निस्तारण में सबसे ज्यादा खानापूर्ति हो रही है। कई अधिकारी तो डीएम की समीक्षा बैठक तक में उपस्थित नहीं हो रहे।
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निलंबित होंगे जिम्मेदार
- मुख्यमंत्री संदर्भ में लापरवाही पर जिम्मेदारों को नोटिस भेजे हैं। स्पष्टीकरण मांगा है। वेतन रोका है। फिर भी निस्तारण में लापरवाही मिली तो उनके विरुद्ध निलंबन की संस्तुति की जाएगी। - प्रशांत तिवारी, नोडल अधिकारी जनसुनवाई
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