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फर्जी बीएड अंकपत्र वाले 40 शिक्षक सेवा से होंगे बाहर

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मैनपुरी। डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम से जारी बीएड के फर्जी अंकपत्र के सहारे नौकरी कर रहे जिले में तैनात 40 शिक्षक सेवा से बाहर किए जाएंगे। हाईकोर्ट का आदेश प्राप्त होने के बाद बीएसए कार्यालय में तैयारी शुरू कर दी गई है। एसआईटी ने इन शिक्षकों की बीएड की डिग्री फेक घोषित की थी। पूर्व में फेक अंकपत्र वाले चार शिक्षकों को सेवा से बाहर किया जा चुका है।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के नाम से वर्ष 2004-05 में बीएड अंकपत्र हासिल कर जिले में 77 लोगों नौकरी हासिल कर ली। एसआईटी ने मामले की जांच की तो जिले में कार्यरत 44 शिक्षकों की बीएड अंकपत्र और डिग्री फेक निकली। इसका डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। एसआईटी ने 33 शिक्षकों की बीएड डिग्री टेंपर्ड घोषित की। इन शिक्षकों ने अंकपत्र में नंबर बढ़वाए थे।
नवंबर 2017 में एसआईटी ने इन शिक्षकों की बर्खास्तगी के लिए सीडी बीएसए कार्यालय को भेजी थी। दो वर्ष तक चली कई चरणों की जांच के बाद 30 नवंबर 2019 को बीएसए विजय प्रताप सिंह ने जिले में तैनात 73 शिक्षकों को बर्खास्तगी पत्र जारी कर दिए थे। चार शिक्षकों को जनवरी 2020 में बर्खास्तगी पत्र जारी किए गए थे। 73 शिक्षक बर्खास्तगी का पत्र आने के बाद कोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने शुक्रवार को आदेश सुनाते हुए फेक अंकपत्र वाले शिक्षकों को सेवा से बाहर करने का आदेश दिया है। साथ ही टेंपर्ड मार्कशीट वालों की जांच दोबारा करने के निर्देश डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय को दिए। कोर्ट का आदेश आने के बाद बीएसए कार्यालय में फेक अंकपत्र वाले शिक्षकों को सेवा से बाहर करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
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चार शिक्षकों ने पहले ही मान ली थी हार
जनवरी 2020 में सेवा से बाहर किए गए चार शिक्षकों जिनकी बीएड डिग्री फेक थी पहले ही हार स्वीकार कर ली थी। वे कोर्ट नहीं गए। अब जिले में फेक बीएड डिग्री से तैनात 40 शिक्षकों का सेवा से बाहर किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट जाएंगे शिक्षक
हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद फेक डिग्री धारक शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया है। शीघ्र ही ये शिक्षक सुप्रीम कोर्ट में न्याय की गुहार लगाएंगे। फेक डिग्री धारक एक शिक्षक ने बताया कि उन लोगों को परीक्षा विश्वविद्यालय ने ही कराई थी। विश्वविद्यालय ने ही उन्हें प्रवेश पत्र जारी किया था। उन्हें सुप्रीम कोर्ट से अवश्य न्याय मिलेगा।
कैसे हुई फेक डिग्री साबित
एक शिक्षक ने बताया कि वर्ष 2004-05 में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध कुछ बीएड कॉलेजों ने आवंटित सीटों से अधिक पर छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया। यही नहीं कॉलेजों की विश्वविद्यालय में इस प्रकार सांठ-गांठ थी कि विश्वविद्यालय ने उन्हें प्रवेश पत्र जारी किया और परीक्षा भी कराई। कॉलेजों से अनुमति से अधिक सीटों पर प्रवेश लेने वाले छात्रों को अंकपत्र भी जारी किया गया। फेक डिग्री जारी करने वालों में जिले के भी कुछ कॉलेज शामिल हैं।
कोर्ट ने फेक डिग्री धारकों को बाहर करने का आदेश जारी किया है। हालांकि अभी आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। आदेश की प्रति मिलते ही जिले में बिना वेतन के कार्य कर रहे 40 शिक्षकों को सेवा से बाहर कर दिया जाएगा। चार शिक्षकों को पहले ही सेवा से बाहर किया जा चुका है।
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विजय प्रताप सिंह बीएसए
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