एसटीएफ के सीओ उदयप्रताप सिंह ने बताया कि शहर में काफी समय से फर्जी अंकतालिका-डिग्री बनाने वाला गिरोह सक्रिय है। इसकी जानकारी पर निरीक्षक हुकुम सिंह के साथ टीम को लगाया था। इसके बाद गिरोह पकड़ा गया। आरोपी नेेकराम से पूछताछ में पता चला कि वह 2007 में भी लोहामंडी पुलिस ने पकड़ा था। तब भी फर्जी अंकतालिका बरामद हुई थीं। उसको शाहगंज और हरीपर्वत पुलिस भी पकड़ चुकी है। वह तेहरा में अपना कॉलेज चलाता है। उसका आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है।
फर्जीवाड़े के दो तरीके
एसटीएफ के निरीक्षक हुकुम सिंह ने बताया कि गिरोह दो तरीके से फर्जीवाड़ा करता था। सदस्य एक तो अलग-अलग विश्वविद्यालय और कॉलेजों में सक्रिय रहते थे। बीए, बीएससी, एलएलबी, डी-फार्मा, बी-फार्मा, बीएड आदि के बारे में जानकारी लेने आने वाले विद्यार्थियों को अपने झांसे में लेते थे। उनका अलग-अलग कॉलेज में फार्म भी भरवा देते थे। इसके बाद 1-2 लाख रुपये में फर्जी अंकतालिका दे देते थे, जब अंकतालिका की जांच होती है तो उसका कॉलेज में फाॅर्म भरा होने की वजह से रिकॉर्ड निकल आता है। वहीं दूसरा तरीका फर्जी अंकतालिका सॉफ्टवेयर की मदद से तैयार करने का है। इन पर हस्ताक्षर और मुहर लगाकर मिनटों में उपलब्ध करा देते थे। इनका निजी कंपनियों में नौकरी के लिए उपयोग होता है।
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