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विश्वविद्यालय में 'अंकों के खेल' से हो रहा था छात्रों के भविष्य से खिलवाड़, आरटीआई में खुलासा

Thu, 21 Feb 2019 12:41 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
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आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय में एक और फर्जीवाड़ा पकड़ में आया है। सूचना अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत विद्यार्थी की ओर से कॉपी मांगी गई। बाद में मूल कॉपी में अंक बढ़ा दिए गए। मूल कॉपी निकलने से पहले उसे स्कैन करा लिया गया था। इससे फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया। परीक्षा विभाग में संबद्ध वरिष्ठ लिपिक रियाजुद्दीन को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया है।
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सत्र 2017-18 की एमएससी बॉटनी अंतिम वर्ष की छात्रा ने आरटीआई के तहत कॉपी देखने के लिए मांगी। विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन किया। छात्रा को एजेंसी की ओर से कॉपी उपलब्ध करा दी गई। 

छात्रा की ओर से कुलपति को प्रार्थनापत्र दिया गया कि उसने आरटीआई के तहत कॉपी मांगी थी। कॉपी में अंकों के जोड़ में अंतर है। कुलपति डॉ. अरविंद कुमार दीक्षित के पास लगातार ऐसी चार-पांच शिकायतें पहुंच चुकी थीं। उन्होंने छात्रा का प्रकरण कुलसचिव केएन सिंह को अग्रसारित कर दिया और इसकी जांच कराने के लिए कहा। 
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लिपिक निलंबित

कुलसचिव ने परीक्षा विभाग में संबद्ध लिपिक रियाजुद्दीन से छात्रा की मूल कॉपी मंगाई। छात्रा को पहले मिले प्राप्तांक और मूल कॉपी में दिए गए प्राप्तांक में तीन अंकों का अंतर निकला। इसकी जानकारी कुलपति को दी गई तो उन्होंने स्कैन की गई कापी से मिलान कराने के लिए कहा गया जो कि पहले से कराकर रखी हुई थी। 

स्कैन की हुई कॉपी से मिलान के बाद फर्जीवाड़ा सामने आया। मूल कॉपी में नंबर बढ़े हुए थे। यह माना गया कि जांच के लिए लाते समय कॉपी में नंबर बढ़ाए गए। कुलसचिव केएन सिंह के मुताबिक कुलपति के आदेश पर वरिष्ठ लिपिक रियाजुद्दीन को निलंबित कर दिया गया है। उसे दाऊदयाल संस्थान में संबद्ध किया गया है। मामले की जांच कराई जाएगी। 

जांच हुई तो कई और मामले सामने आ सकते हैं

आरटीआई के तहत मांगी गई सभी कॉपियों की जांच कराई गई तो नंबर बढ़ाने के और भी मामले सामने आ सकते हैं। आरटीआई के तहत ऑनलाइन कापी दिए जाने की व्यवस्था लागू किए जाने के बाद करीब 3000 छात्र-छात्राओं को कॉपियां देखने के लिए दी गईं। 

स्नातक स्तर पर 300 रुपये और परास्नातक स्तर पर 500 रुपये छात्र-छात्राओं से कॉपी दिए जाने के लिए लिया जाता है। स्कैन की गई कॉपी दी जाती है। पिछले कुछ दिनों से आरटीआई के तहत दी गई कॉपियों के संबंध में छात्रों की शिकायत बढ़ गई है। अंकों के जोड़ में भिन्नता की बात कही जा रही थी। 
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दो सत्रों से कापियां स्कैन कराई जा रही

विश्वविद्यालय प्रशासन दो सत्रों से कॉपियों को स्कैन करा रहा है। विश्वविद्यालय में सर्वाधिक जांचें अंकों में छेड़छाड़ के कारण बैठी हुई हैं। इसको देखते हुए कापियों को स्कैन कराकर रखा जा रहा है, जिससे बाद में किसी स्तर पर अंकों से छेड़छाड़ की जाती है तो उसे पकड़ा जा सके। स्कैन कापी से ही अंक बढ़ाने का खेल पकड़ा गया है। 

रियाजुद्दीन पहले भी जा चुका है जेल 

आरोपी रियाजुद्दीन पहले भी फर्जीवाड़े में जेल जा चुका है। करीब पांच वर्ष पहले तत्कालीन डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने फर्जी मार्कशीट बनाने वाला रैकेट पकड़ा था। उसमें रियाजुद्दीन को अर्जुन नगर से गिरफ्तार किया गया था। उस समय वह परीक्षा विभाग में ही बीएससी तृतीय वर्ष का प्रभारी था। 

जेल से छूटने के बाद फिर से परीक्षा विभाग में ही संबद्ध कर लिया गया। शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के महामंत्री अनिल कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि दोबारा परीक्षा विभाग में तैनाती देना ही गलत था। तैनाती देने वाले अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।  
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