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76 करोड़ का GST घोटाला: दोस्त के नाम पर बनाई फर्म, खुद संभाले दस्तावेज; चार महीने में कर दिया करोड़ों का खेल

Mon, 11 May 2026 12:00 PM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में बोगस फर्म बनाकर चार महीने के भीतर 76 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी लेन-देन करने का मामला सामने आया है। जांच में बिना माल सप्लाई किए फर्जी बिलिंग और करोड़ों की इनपुट टैक्स क्रेडिट चोरी का खुलासा हुआ है।
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यूपी में बड़ी जीएसटी चोरी - फोटो : सांकेतिक
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विस्तार
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आगरा में बोगस फर्म बनाकर 76 करोड़ रुपये का फर्जी लेन-देन करने का मामला सामने आया है। एक फर्म संचालक ने अपने परिचित के नाम पर दूसरी फर्म बनाई। फर्म के नाम से ही बैंक में खाता भी खोल लिया। इस खाते में 4 महीने के अंदर 76.15 करोड़ से अधिक का लेन-देन कर दिया। बैंक ने संदिग्ध लेन-देन की जानकारी पर जीएसटी विभाग में शिकायत दर्ज करा दी। जांच में फर्जीवाड़ा सामने आ गया। मामले में थाना लोहामंडी में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
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प्राथमिकी राज्य कर अधिकारी अतुल कुमार आर्य ने दर्ज कराई है। पंजाब नेशनल बैंक की सीनियर ब्रांच मैनेजर तुलिका श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी। 27 नवंबर 2024 को मैसर्स दिनेश ट्रेडर्स के नाम से एक चालू खाता खोला गया था। फर्म का प्रोपराइटर सुल्तानपुरा निवासी दिनेश अग्रवाल को बताया गया। इसकी प्रकृति आढ़तिया दिखाई गई। उद्यम प्रमाण पत्र भी दिया गया। दिसंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच चार महीने में इस खाते से 76.15 करोड़ रुपये का लेन-देन किया गया। यह घोषित व्यापार से काफी अधिक था। इसकी जानकारी पर बैंक ने विभागीय अधिकारियों को बताया। वाणिज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा ने इस फर्म की जांच की।

 

मास्टरमाइंड कोई और निकला
जीएसटी विभाग की जांच टीम ने फर्म खुलवाने वाले दिनेश अग्रवाल से बात की। उन्होंने बताया कि फर्म सुमित जिंदल ने धोखे से विश्वास में लेकर खुलवाई थी। इसके लिए रुपयों का प्रलोभन भी दिया था। मंडी समिति में रजिस्ट्रेशन भी कराया था। सुमित जिंदल से 10 साल से पहचान थी मगर उन्होंने 4 साल पहले फर्म बनाई थी। सुमित जिंदल उसे बुलाकर चेक बुक और अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाता था। पैन कार्ड और फर्म से जुड़े दस्तावेज भी उसी ने अपने पास रखे हुए हैं। दिनेश का कहना था कि उसे 76 करोड़ के ट्रांजेक्शन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। फर्म के जीएसटी, पैन और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी सुमित जिंदल के पास ही रहते थे।

 

बिना माल की सप्लाई, करोड़ों की आईटीसी चोरी
विभाग की जांच में पाया गया कि इस फर्म का मुख्य उद्देश्य बोगस बिलिंग करना था। बिना किसी माल की वास्तविक सप्लाई किए केवल कागजों पर ट्रांजेक्शन दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट पास किया जा रहा था। 17 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन मैसर्स शिव ट्रेडर्स नामक एक अन्य फर्म में किया गया। यह सुमित जिंदल की थी। फर्म पर भी विभाग का लगभग 9 करोड़ रुपये बकाया है। विभाग ने दिनेश ट्रेडर्स के खाते से 70.74 लाख रुपये की रिकवरी भी की है। वाणिज्य कर विभाग और बैंक की शिकायत पर लोहामंडी पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अब सुमित जिंदल सहित अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
 
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लगातार की जा रही कार्रवाई
एडिशनल कमिश्नर, ग्रेड 1 पंकज गांधी ने बताया कि बोगस फर्म बनकर जीएसटी डकारने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। विभागीय जांच के बाद पुलिस को तहरीर दी जा रही हैं, ताकि ऐसे लोगों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा सके। 

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