फर्जी मुठभेड़ मामले में दो आरक्षी निलंबित कर दिए गए हैं। तत्कालीन इंस्पेक्टर के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की गई है। इसके पूर्व जांच में इंस्पेक्टर सहित चार को दोषी पाया गया। मामले में कार्रवाई की जानकारी एसएसपी सुनील कुमार सिंह ने दी।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक मुठभेड़ के बाद शराब व गांजा के साथ जिन दस लोगों को जेल भेजा गया था वे दोषी नहीं पाए गए। जिस ढाबा पर फायरिंग होना बताया गया वहां कोई गोली नहीं चली है। चार फरवरी को सभी इत्तेफाक से ढाबा पर खाना खाने पहुंचे थे। तभी तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक कोतवाली देहात इंद्रेशपाल, आरक्षी संतोष व शैलेंद्र यादव द्वारा फर्जी मुठभेड़ व झूठी बरामदगी दिखाई गई इसमें शराब माफिया बंटू यादव की मिलीभगत सामने आई।
लॉकडाउन का एक साल: लॉकडाउन में सुधर गई हवा, अनलॉक में घुला जहर
शिकायतकर्ता प्रवीन कुमार के भाई पुष्पेंद्र यादव व चचेरे भाई दीपक यादव का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। जेल भेजे गए तीन आरोपी बिहार के हैं जब कि अन्य अलग-अलग गांव के हैं। चार फरवरी को सभी इतफाक से ढाबा पर खाना खाने पहुंचे थे, तभी प्रभारी निरीक्षक इंद्रेशपाल, आरक्षी संतोष यादव व शैलेंद्र यादव ने झूठी बरामदगी दिखाई गई। तीनों ने शराब माफिया बंटू यादव के साथ मिलकर खेल किया। जांच में आशू यादव, टिंकू यादव निवासीगण गांव दरिगपुर का अपराधिक इतिहास मिला है, जबकि अन्य का कोई अपराधिक इतिहास नहीं है। इंस्पेक्टर सहित चारों को जांच में दोषी मानकर विधिक और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है।