प्राथमिकता से बनवाते हैं ऐसे लोगों का लाइसेंस
एआरटीओ (प्रशासन) अनिल कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2005 से 2010 के बीच के कई लाइसेंस ऐसे सामने आते हैं, जिनका रजिस्टर में ब्यौरा दूसरे लोगों के नाम का मिलता है। ऐसे में यह लाइसेंस फर्जी माने जाते हैं। रसीद बुक में भी उसी व्यक्ति के नाम से फीस कटी हुई होती है। ऐसे में हम लोगों को राहत देने की प्राथमिकता से लाइसेंस बनवा देते हैं। यह पुरानी गड़बड़ियां हैं, जिन्हें ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है।
28 कर्मचारियों के फर्जी लाइसेंस बने थे आगरा से
एआरटीओ प्रशासन ने बताया कि आरटीओ आगरा से दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारियों ने लाइसेंस बनवाए थे। जब आगरा कार्यालय से जानकारी मांगी गई तो उनका रिकॉर्ड ही नहीं मिला। इसकी रिपोर्ट दी गई तो सभी को नौकरी से हटा दिया गया। जवानों का केस उच्चतम न्यायालय तक चला मगर अंत में उनकी नौकरी नहीं बची। इसी तरह डीटीसी के 18 चालकों के लाइसेंस भी आगरा से बनवाए गए थे। इन चालकों को भी बर्खास्त कर दिया गया था।