आगरा में वाहनों का ऑनलाइन टैक्स जमा कराने के नाम पर जैसा केंद्र सैंया में चल रहा था, वैसे ही 50 से अधिक आरटीओ दफ्तर के पास ही हैं। जो दो साल से चल रहे हैं। दलाल भी इन पर ही बैठते हैं। ये डीएल बनवाने से लेकर आरसी जारी कराने तक के ठेके ले रहे हैं।
यहां पंजीकृत केंद्र सिर्फ छह हैं। इनके संचालक आरटीओ में फर्जी केंद्रों की शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब सवाल यह उठ रहा है कि विजिलेंस और पुलिस इनकी चेकिंग क्यों नहीं कर रही ? आरटीओ दफ्तर के पास ही फर्जी प्रदूषण जांच केंद्र भी चल रहे हैं।
एक साल में तीन बार शिकायत की...जांच तक नहीं हुई
आरटीओ के बाहर जन सुविधा केंद्र चला रहे अकील उस्मानी, अशोक दिवाकर, ललिता प्रजापति, धर्मेंद्र चौहान, मोहन सिंह और रवि कश्यप ने बताया कि वे एक साल में तीन बार आरटीओ से फर्जी केंद्रों की शिकायत कर चुके हैं। एक बार भी इनकी चेकिंग तक नहीं कराई गई है। फर्जी केंद्रों की संख्या 50 से ज्यादा है। जनसुविधा केंद्र का पंजीकरण एनआईसी में कराना होता है, इन्होंने नहीं कराया है।
लिखित शिकायत आएगी तो कार्रवाई करेंगे : एआरटीओ
एआरटीओ (प्रशासन) अनिल कुमार सिंह ने बताया कि ऑनलाइन फीस घर बैठे कंप्यूटर या मोबाइल से भी जमा कराई जा सकती है। जनसुविधा केंद्रों पर भी यही काम हो रहा है। जो केंद्र पंजीकृत नहीं है, यदि उनके बारे में लिखित शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी। जहां तक प्रदूषण जांच केंद्रों की बात है तो वह जरूरत से ज्यादा चल रहे हैं। इन्हें हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
दलालों के पास जाना मजबूरी बना दिया
आगरा पब्लिक वेलफेयर एसोसिएशन के देवेंद्र गुप्ता ने कहा कि आरटीओ दफ्तर में काम हो जाए तो कोई दलालों के पास या फर्जी केंद्रों में क्यों जाए। ट्रांसपोर्टर दफ्तर में जाते हैं तो छोटे से काम के लिए भी बाबू इतने चक्कर लगवाते हैं कि दलाल या फर्जी केंद्रों पर जाना मजबूरी हो जाता है। अगर अफसर चाहें तो क्या मजाल की दलाल एक दिन भी टिक जाएं।
50 रुपये फीस, फर्जी केंद्र पर 100 वसूल रहे
लोहामंडी नौबस्ता निवासी धर्मवीर कुशवाह ने कहा कि भारी वाहन के लाइसेंस की फीस जमा करने पहुंचा तो अपंजीकृत केंद्र पर 100 रुपये वसूले गए। यहां सभी दुकानों में फीस काटी जा रही है। कौन असली है और कौन नकली, पता ही नहीं चल पाता है। मुझे बाद में जानकारी हुई कि केंद्र फर्जी था और फीस 50 रुपये है।
सीकरी में छह फर्जी दफ्तरों पर लटके ताले
ऑनलाइन टैक्स जमा कराने के नाम पर जैसा दफ्तर सैंया में खुला था, वैसे ही छह दफ्तर सीकरी में भी हैं। इनके नाम के साथ आरटीओ लिखा है। सैंया में छापे के बाद इन पर शुक्रवार को ताले लटके रहे। इनके संचालक भूमिगत हो गए हैं।
सीकरी थाना क्षेत्र के राजस्थान सीमा के समीप से ही यूपी ऑनलाइन टैक्स ऑफिस की शुरुआत हो जाती है, जो चौमा शाहपुर पुलिस चौकी के आसपास, मोड़ बाईपास, कौरई टोल प्लाजा तक संचालित हैं। कई बार गुजरात, महाराष्ट्र, लखनऊ, गोरखपुर को जाने वाली बसों से लोगों ने हजारों रुपये की ठगी कर फर्जी रसीद भी थमा दी है।
मुकदमा दर्ज... फिर भी कार्रवाई नहीं
चेकिंग के दौरान पकड़े जाने पर सीकरी थाने में ऑनलाइन टैक्स संचालकों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ था, लेकिन ये केंद्र बंद नहीं हुए। न ही मुकदमे में कार्रवाई हुई। ये लोग राजस्थान की ओर से आने वाली गाड़ियों के यूपी प्रवेश पर टैक्स काटते हैं।
आरटीओ का लाइसेंस बताते हैं अपने पास
सीकरी के श्यामवीर सिंह और जसवंत सिंह ने बताया कि वे जब भी राजस्थान से सामान लेकर आए हैं, इन केंद्रों पर ही टैक्स जमा कराया है। इनके संचालक कहते हैं कि उनके पास आरटीओ का लाइसेंस है। उधर, आरटीओ ने साफ किया है कि एक भी लाइसेंस जारी नहीं किया गया है।