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फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण: शोभित को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, गिरफ्तारी पर रोक लगाने की याचिका हुई खारिज

Tue, 10 Jun 2025 09:41 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में हाईकोर्ट ने कहा है कि अफसरों की भागीदारी के बिना शस्त्र क्लर्क और शोभित के बीच मिलीभगत संभव नहीं है। 
 
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फर्जी शस्त्र लाइसेंस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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फर्जी शस्त्र और लाइसेंस के मामले में आरोपियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिल सकी। हाईकोर्ट ने आरोपी शोभित चतुर्वेदी के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने व गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की खंडपीठ ने आदेश में लिखा कि अफसरों की भागीदारी के बिना शस्त्र क्लर्क व शोभित के बीच मिलीभगत संभव नहीं है।
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इस मामले में आगरा की थाना नाई की मंडी में केस दर्ज हुआ है। शोभित पर आरोप है कि उसने आवेदन में गलत सूचना देकर बेरेटा पिस्तौल खरीदी। उसके पास पहले से उत्तराखंड से जारी रिवॉल्वर का लाइसेंस था, लेकिन आवेदन में इस जानकारी को छिपा लिया गया। साथ ही सिंगल बैरल ब्रीच लोडिंग गन का लाइसेंस भी गलत जानकारी देकर प्राप्त किया गया, जिसमें जन्मस्थान लखनऊ के बजाय आगरा दर्शाया गया। इस मामले में शस्त्र लिपिक संजय कुमार पर भी मिलीभगत का आरोप है।

 

शोभित की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा है कि प्रथम दृष्टया यह गंभीर मामला है, जिसमें आवेदन के कॉलमों में झूठी जानकारी दी गई। पुराने लाइसेंसों का विवरण छिपाया गया और पिस्तौल की खरीद वैध दस्तावेजों के बिना की गई। ऐसी स्थिति में एफआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है कि शस्त्र क्लर्क और शोभित के बीच इस प्रकार की मिलीभगत वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी के बिना संभव नहीं हो सकती।

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एसटीएफ की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
इस मामले में थाना नाई की मंडी में मीडिया कर्मी शोभित चतुर्वेदी, प्रॉपर्टी डीलर भूपेंद्र सारस्वत, उसके पिता शिव कुमार सारस्वत, सेवानिवृत्त क्लर्क संजय कपूर, राजेश बघेल, मोहम्मद अरशद और जैद के खिलाफ केस दर्ज है। एसटीएफ के इंस्पेक्टर यतेंद्र शर्मा ने शिकायतकर्ता विशाल भारद्वाज की शिकायत पर 9 महीने तक जांच की थी। इसके बाद अधिकारियों के आदेश पर केस लिखा गया। डीजीपी के आदेश पर विवेचना एसटीएफ को दी गई है। मगर, 16 दिन बाद भी गिरफ्तारी न होने से एसटीएफ की विवेचना पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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 पिस्ताैल खरीदीं, लेकिन रसीद नहीं
उधर, एसटीएफ की जांच में पता चला था कि शोभित ने शिव कुमार सारस्वत से बेवले पिस्ताैल ली थी। अपने लाइसेंस में इस चढ़वा लिया। कुछ समय बाद आरोपी राजेश बघेल से उसकी बेरेटा पिस्ताैल ले ली। उसे अपनी पिस्ताैल दे दी। दोनों ने इन्हें अपने लाइसेंस पर चढ़वा लिया। मगर, उनके पास खरीद की रसीद नहीं है। वह शस्त्र विक्रेताओं के बारे में भी नहीं बता सके। तीनों के शस्त्र लाइसेंस डुप्लीकेट होने की भी पुष्टि हुई। शिव कुमार सारस्वत ने पूर्व में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष को भी शस्त्र दे चुका है। इस मामले में भाजपा नेता भी थाना जगदीशपुरा में शिव कुमार के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
 
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