इस मामले में आगरा की थाना नाई की मंडी में केस दर्ज हुआ है। शोभित पर आरोप है कि उसने आवेदन में गलत सूचना देकर बेरेटा पिस्तौल खरीदी। उसके पास पहले से उत्तराखंड से जारी रिवॉल्वर का लाइसेंस था, लेकिन आवेदन में इस जानकारी को छिपा लिया गया। साथ ही सिंगल बैरल ब्रीच लोडिंग गन का लाइसेंस भी गलत जानकारी देकर प्राप्त किया गया, जिसमें जन्मस्थान लखनऊ के बजाय आगरा दर्शाया गया। इस मामले में शस्त्र लिपिक संजय कुमार पर भी मिलीभगत का आरोप है।
शोभित की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा है कि प्रथम दृष्टया यह गंभीर मामला है, जिसमें आवेदन के कॉलमों में झूठी जानकारी दी गई। पुराने लाइसेंसों का विवरण छिपाया गया और पिस्तौल की खरीद वैध दस्तावेजों के बिना की गई। ऐसी स्थिति में एफआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है कि शस्त्र क्लर्क और शोभित के बीच इस प्रकार की मिलीभगत वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी के बिना संभव नहीं हो सकती।
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एसटीएफ की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
इस मामले में थाना नाई की मंडी में मीडिया कर्मी शोभित चतुर्वेदी, प्रॉपर्टी डीलर भूपेंद्र सारस्वत, उसके पिता शिव कुमार सारस्वत, सेवानिवृत्त क्लर्क संजय कपूर, राजेश बघेल, मोहम्मद अरशद और जैद के खिलाफ केस दर्ज है। एसटीएफ के इंस्पेक्टर यतेंद्र शर्मा ने शिकायतकर्ता विशाल भारद्वाज की शिकायत पर 9 महीने तक जांच की थी। इसके बाद अधिकारियों के आदेश पर केस लिखा गया। डीजीपी के आदेश पर विवेचना एसटीएफ को दी गई है। मगर, 16 दिन बाद भी गिरफ्तारी न होने से एसटीएफ की विवेचना पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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