आगरा में हुए सनसनीखेज हत्याकांड में 11 साल बाद दो आरोपी बरी कर दिए गए। इस मामले में साक्ष्यों की कड़ियां आपस में जुड़ नहीं पाईं। गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास था।
धारदार हथियार से युवक की हत्या के मामले में दिए गए साक्ष्यों की कड़ियां आपस में जुड़ नहीं पाईं। गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास था। इस पर एडीजे-17 नितिन कुमार ठाकुर ने थाना शमसाबाद के गांव गोपाल पुरा निवासी आरोपी गौरव दीक्षित और सोनू को बारी करने के आदेश दिए।
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थाना ताजगंज में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, शमसाबाद निवासी विजय कांत ने 4 जुलाई 2014 को तहरीर दी थी। बताया था कि उनके पिता जनक सिंह पांच भाई हैं। चाचा फतेह सिंह और वीरेश से उनका पुरखों की जमीन और मकान के हिस्से के बारे में रंजिश है। 3 जुलाई 2014 की शाम वादी के भाई ओमकांत (22) को एक युवक घर से बुलाकर ले गया था।
अगले दिन सुबह शव लोधई के समीप सड़क किनारे खंदी में पड़ा मिला। पहले दूसरे लोगों पर आरोप लगाए गए। घटना के 6 महीने बाद 11 मार्च 2015 को वादी ने फिर ताजगंज थाने में तहरीर दी। इस बार गौरव दीक्षित और सोनू पर भाई की हत्या करने का आरोप लगाया था।