आगरा। फतेहपुरसीकरी के हर घर को गंगाजल मिलेगा। नरौरा बैराज से 2300 मिमी व्यास की पाइपलाइन बिछाकर उससे पूरे जिले के ब्लॉकों को जोड़ा जाएगा। इससे हर घर तक नल से गंगाजल पहुंचाया जाएगा। 6779.57 करोड़ रुपये की इस योजना को फतेहपुरसीकरी के सांसद राजकुमार चाहर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्वीकृति दिला दी है। जल जीवन मिशन के तहत 126 किमी की दूरी से नरौरा से पानी लाकर हर घर जल योजना में वर्ष 2024 तक दे दिया जाएगा। पहले चरण में 576 ग्राम पंचायतों के 725 राजस्व ग्रामों में हर घर नल से जल पहुंचाने की योजना बनाई जाएगी।
सांसद राजकुमार चाहर ने बताया कि नरौरा बैराज से 2300 मिमी व्यास की पाइपलाइन बिछाकर 126 किमी दूर नारखी, टूंडला तक गंगाजल लाया जाएगा। नारखी में गंगाजल के लिए वाटरवर्क्स बनाया जाएगा, जिससे आगरा के सभी विकास खंडों को पानी उपलब्ध कराया जाएगा। यह पंपिंग स्टेशन आधारित योजना होगी, जिसमें मोटरों के जरिए पानी पंप करके लाया जाएगा, जबकि शहर में बिना बिजली के पालड़ा से सिकंदरा तक पानी पहुंचता है। इसमें दो डीपीआर बनवाई गई है। इसमें 2661.25 करोड़ रुपये की कंबाइंड राइजिंग मेन, हेड वर्क्स फॉर इनटेक होगी, जबकि 4118.32 करोड़ रुपये की दूसरी योजना मल्टी विलेज रूरल पाइप्ड वाटर सप्लाई योजना होगी। दोनों योजनाएं एक साथ काम करेंगी।
पूर्व में फतेहपुरसीकरी के हर घर को नल से जल पहुंचाने के लिए 1030 करोड़ रुपये की लागत से नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी को काम सौंपा गया था, लेकिन 300 गांवों का सर्वे करने के बाद पता चला कि चंबल में पेयजल की मात्रा कम है और मानकों के अनुरूप नहीं है। भूगर्भ जल खारा है और काफी नीचे है। डार्क जोन में होने के कारण भूगर्भ जल निकासी मुश्किल है। इसलिए गंगाजल का विकल्प चुना गया। घड़ियालों और सेंक्चुअरी के कारण चंबल नदी में पानी एक निश्चित मात्रा तक रखना अनिवार्य है। ऐसे में गंगाजल को बेहतर माना गया। शहर की तरह पाइपलाइन के जरिए गांवों में गंगाजल की योजना पर सहमति बनी।
पानी के संकट से फतेहपुरसीकरी 430 साल से जूझ रहा है। शहर की तरह नरौरा से गंगाजल लाकर यहां पानी का ऐसा प्रबंध हो जाएगा कि कई सालों तक पानी का संकट नहीं रहेगा। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन में गंगाजल दिलाने की योजना को मंजूरी दे दी है। मेरा लक्ष्य फतेहपुरसीकरी के तेरहमोरी बांध को भी पानी से लबालब करने का है, जिसके लिए प्रयासरत हूं। - राजकुमार चाहर, सांसद, फतेहपुरसीकरी
1571 में अकबर ने बसाई थी फतेहपुरसीकरी
1585 में पानी की कमी से राजधानी हटाई
2010 की बाढ़ में तेरहमोरी बांध में आया पानी
12 वर्षों से बांध सूखा, डूबक्षेत्र में हो रही खेती
2661.25 करोड़ से बिछेगी नारखी तक पाइपलाइन
4118.32 करोड़ से गांवों में बनेगा पेयजल नेटवर्क
फतेहपुरसीकरी का सबसे पहला नाम सैकरिक्य है, यानि पानी से घिरा क्षेत्र। कालांतर में यहां पानी का संकट पैदा हुआ। मुगलिया दौर में पानी के संकट के कारण देश की राजधानी होने के बाद भी बादशाह अकबर को इसे छोड़कर जाना पड़ा। पहाड़ी पर बने महलों में पानी की बूंद-बूंद को बचाने का पूरा सिस्टम था और तेरहमोरी बांध बनाया गया, जहां राजस्थान की नदियों से पानी झील में आकर बांध के जरिए आता था। आखिरी बार 2010 की बाढ़ में पानी झील में दिखा, लेकि तब से अब तक बांध सूखा पड़ा है।