आगरा में यमुनापार के दो लाख लोग तीन दिन बिजली न होने से बूंद-बूंद पानी के लिए तरस गए, पर उन्हीं दिनों में कैलाश घाट पर गंगाजल यमुना में बहाया जाता रहा। हर दिन 50 से 60 एमएलडी गंगाजल यमुना नदी में फेंका जा रहा है, जबकि यमुनापार के लोगों को गंगाजल छोड़िए, खारा भूगर्भ जल भी मयस्सर नहीं हो रहा। हैरतअंगेज पहलू ये है कि गंगाजल की बर्बादी हो रही है, जबकि यमुनापार नाई की सराय ट्यूबवेल योजना से केवल आठ एमएलडी भूगर्भ जल की निकासी हो पा रही है। क्षेत्रीय पार्षद और विधायक बर्बाद हो रहे गंगाजल को यमुनापार तक पहुंचाने की मांग कर रहे हैं।
एत्मादपुर के विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह ने बताया कि यमुनापार नाई की सराय में पंप क्षमता बढ़ाने के साथ यहां गंगाजल की लाइन बिछवाने का प्रयास कर रहे हैं। इस बारे में जलनिगम के एमडी से वार्ता हुई है। कोरोना के कारण जीवनी मंडी पर मोटर पंप की क्षमता बढ़ाने का काम लेट हुआ है। कोशिश है कि यमुनापार के लिए भी गंगाजल उपलब्ध हो जाए।
नाई की सराय पार्षद मिथिलेश ने बताया कि नाई की सराय में ट्यूबवेल की जगह गंगाजल भेजा जाए। फाउंड्री नगर तक जीवनी मंडी से पानी आता है। मेन राइजिंग लाइन बिछाकर नाई की सराय को जोड़ा जा सकता है। इससे बिजली न होने की समस्या दूर हो जाएगी, वहीं लोगों को खारे पानी की जगह गंगाजल मिल पाएगा।
जलनिगम, गंगाजल इकाई के प्रोजेक्ट मैनेजर महेश गौतम ने बताया कि गंगाजल की मात्रा ज्यादा है, जो शहर में पूरा नेटवर्क बनने पर उपयोग हो सकेगी, इसलिए अतिरिक्त पानी यमुना नदी में छोड़ा जा रहा है। यमुनापार तक गंगाजल ले जाने की योजना शासन को भेजी है, जिसमें नाई की सराय समेत पूरे यमुनापार में गंगाजल पहुंचाया जा सकेगा।
एत्मादपुर के विधायक डा. धर्मपाल सिंह ने अपने पिछले कार्यकाल में यमुनापार के पानी के संकट को देखते हुए नाई की सराय में 16 ट्यूबवेल लगवा कर सप्लाई शुरू कराई थी, पर छह साल में तीन ट्यूबवेल का पानी उतर गया। इनके रीबोर होने की जरूरत है। ऐसे में केवल 12 से 13 ट्यूबवेल ही रोजाना काम कर पा रहे हैं, जिनसे पांच से छह एमएलडी पानी ही जलाशयों और ओवरहेड टैंक तक पहुंचता है। यमुनापार की कालोनियों के लिए पानी की जरूरत 40 से 45 एमएलडी है, जो कैलाशघाट पर हर दिन यमुना में मिलकर बर्बाद हो रहा है। पाइप लाइन के जरिए यह जीवनी मंडी वाटरवर्क्स से यमुनापार तक पहुंचाया जा सकता है।
आवास विकास कॉलोनी में सेंट्रल पार्क के पास रोड पर लीकेज लाइन से गंगाजल बर्बाद होकर तीन दिन से बह रहा है। क्षेत्र में पानी के संकट से लोग बाल्टियां लेकर सबमर्सिबल पंप की तलाश में भटक रहे हैं, जबकि सड़क के 100 मीटर से ज्यादा हिस्से पर लीकेज के कारण जलभराव है।