एटा जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति से बदलकर ओबीसी महिला के लिए आरक्षित कर दी गई है। इससे जिले में राजनीति दलों के नेताओं का गणित गड़बड़ा गया है। अब तक स्वयं चुनाव लड़ने का ख्वाब देख रहे नेताओं को बदली परिस्थिति में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज होने के लिए परिवार की महिलाओं का सहारा लेना पड़ेगा। कारण जिले में अभी तक कोई दमदार महिला प्रत्याशी ने ताल नहीं ठोकी है। इससे संकेत साफ हैं कि दिग्गज नेता अपनी पत्नी या परिवार की किसी महिला को चुनावी रण में उतारेंगे।
जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पिछली बार एससी वर्ग में आरक्षित थी। इस सीट पर निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष राजकिशोर सिंह चुनाव जीते थे, जबकि उससे पूर्व सीट सामान्य थी और सपा से जुगेंद्र सिंह यादव जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए। चुनाव में आरक्षण की बात चली तो दो मार्च को शासन से जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण घोषित करते हुए सीट को बीसी महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया था, पर हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2015 के आधार पर आरक्षण लागू करने के फरमान के चलते यह सीट ओबीसी महिला के खाते में चली गई है।
इन जातियों में होगा मुकाबला
जिला यादव और लोधी बाहुल्य है। सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित होने के कारण दोनों ही वर्ग के नेताओं के परिवार की महिलाएं इस सीट पर अपना दावा ठोकेंगी। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह जहां जिला पंचायत पर फिर से काबिज होने की जुगत भिड़ाएंगे वहीं भाजपा समर्थित लोधी समाज से किसी दिग्गज नेता की पत्नी के चुनाव मैदान में उतरने के कयास लगाए जा रहे हैं।