एसडीएम जलेसर अलंकार अग्निहोत्री ने 22 जून को आदेश जारी किया था। इसमें बताया कि तहसील क्षेत्र की अल्पसंख्यक समुदाय की जिन बालिकाओं ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में अच्छे अंक प्राप्त किए हैं, उनमें से 11 बालिकाओं को 2100 रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिए जाएंगे।
एटा की जलेसर तहसील प्रशासन द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय की मेधावी छात्राओं को प्रोत्साहित किए जाने की घोषणा पर जिला प्रशासन फंस गया है। मानवाधिकार आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। एसडीएम जलेसर को मानवाधिकार आयोग में तलब किया गया है।
विज्ञापन
उप्र मानवाधिकार आयोग लखनऊ के अध्यक्ष बाल कृष्ण नारायण ने डीएम को आदेश जारी करते हुए कहा है कि अल्पसंख्यक समुदाय की बेटियों को प्रोत्साहन राशि देना प्रशंसनीय है, लेकिन हिंदू व अन्य समुदाय की मेधावी बालिकाओं को प्रोत्साहन राशि न देना भेदभाव पूर्ण है। इस प्रकार का मामला प्रथम दृष्टया मानवाधिकार हनन का प्रतीत होता है, जो अति आवश्यक एवं गंभीर है।
जांच के दिए आदेश
उप्र मानवाधिकार आयोग लखनऊ के अध्यक्ष बाल कृष्ण नारायण ने जिलाधिकारी एटा अंकित कुमार अग्रवाल को आदेश दिया है कि प्रकरण में जांच कराकर अपनी आख्या के साथ एसडीएम जलेसर को 6 जुलाई को आयोग में भेजें।
यह है मामला
एसडीएम जलेसर अलंकार अग्निहोत्री ने इस संबंध में 22 जून को आदेश जारी किया था। इसमें बताया कि तहसील क्षेत्र की अल्पसंख्यक समुदाय की जिन बालिकाओं ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में अच्छे अंक प्राप्त किए हैं, उनमें से 11 बालिकाओं को 2100 रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिए जाएंगे। यह निर्णय बड़े मियां दरगाह शनिजात के लिए नियुक्त प्रशासनिक समिति द्वारा लिया गया है। 26 जून तक छात्राएं अपने अंकपत्र तहसील कार्यालय में उपलब्ध करा सकती हैं। प्राप्त आवेदनों में से मैरिट के आधार पर 11 बालिकाओं को पुरस्कृत किया जाएगा।