फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मिर्गी: बड़ा कारण बच्चों की देखभाल में कमी

Fri, 02 Oct 2015 02:13 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
विज्ञापन
अगर बच्चे के पेट में कीड़े (टेपवर्म) हैं, तो दिमाग में पहुंचकर उसे मिर्गी का रोगी बना सकते हैं। दुनिया भर के प्रमुख न्यूरोफिजिशियन मिर्गी की बड़ी वजह बच्चों की देखभाल ठीक से न होना मानते हैं। एनुअल कांफ्रेंस ऑफ इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी (इनकॉन-2015) का 23वां राष्ट्रीय अधिवेशन का बृहस्पतिवार को मिर्गी  पर केंद्रित रहा। होटल जेपी पैलेस में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन मशहूर अभिनेत्री शबाना आजमी ने किया। अधिवेशन में 40 देशों के 2000 विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। पहले दिन 130 शोध पत्र पढ़े गए।
विज्ञापन

 कंट्यूनस मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) के तहत आयोजित एकेडमिक सेशन में डाक्टरों ने मिर्गी के कारणों पर रोशनी डाली। जैसे, बच्चों को सिर पर चोट लग जाने पर अगर खून नहीं निकलता, तो डाक्टर को नहीं दिखाया जाता। खून अंदर थक्का और बाद में मिर्गी का कारण बनता है। यह बच्चे के पेट में कीड़े के इलाज में लापरवाही भी से भी संभव है। गर्भावस्था में मिर्गी की महिला मरीज के उपचार में लापरवाही से गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क पर असर पड़ता है। सत्र का शुभारंभ डा. देविका नाग ने किया। संयोजक डा. कल्याण भट्टाचार्य (कोलकाता) और डा. लक्ष्मी नरसिम्हा (चेन्नई ) रहे। शाम को अधिवेशन का विधिवत उद्घाटन हुआ। इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के अध्यक्ष डा. अरविंद मुखर्जी ने मुख्य अतिथि शबाना आजमी और विशिष्ट अतिथि वर्ल्ड फेडरेशन आफ न्यूरोलोजी के अध्यक्ष राद शाकिर को स्मृति चिह्न दिया। इनकॉन के संयोजक एसएन मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. पीके माहेश्वरी ने सभी का आभार जताया। एसएन मेडिकल कालेज प्राचार्य डा. एसके गर्ग, डा. रमाकांत यादव, डा. निर्मल सूर्या, डा. गगनदीप सिंह, डा. सर्वेश अग्रवाल, डा. सुभाष कौल आदि मौजूद रहे।   
70 फीसदी में मिर्गी नहीं
वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजी के अध्यक्ष राद शाकिर ने बताया कि मिर्गी के 70 फीसदी मरीजों की जांच में मिर्गी नहीं ह्यूमन डिसआर्डर, नींद न आना, तनाव निकलता है। उन्होंने चिकित्सकाें को सीख दी कि जरूरी है कि सही से जांच करें। मरीज के परिजन-मित्र और सगे-संबंधी से बीमारी की हिस्ट्री पता करें। उन्होेंने बताया कि ऐसे मरीज भी होते हैं, जो जिनमें मिर्गी का असर चार-पांच सेकंड ही रहता है। मरीज को पता तक नहीं चलता। उन्होंने बीमारी के प्रति जागरूकता को जरूरी बताते हुए इलाज पर जोर दिया।  
विज्ञापन

इन्होंने भी दिए व्याख्यान                                                                                                    -  डा. सुनील प्रधान (लखनऊ) ने मांसपेशियों के गलने के उपचार की नई विधि और डा. राहुल कुलकर्णी ( पुणे) ने जोड़ों के सूजन में दर्द के कारण बताए। डा. आनंद कुमार (कोच्चि) ने दिल की बीमारी में दिमाग के संबंध तो डा. मेथ्यू एलेक्जेंडर ( तमिलनाडु ) ने नसों की एलर्जी पर लेक्चर दिया। डा. एसआर चंद्रा (बंगलुरु) सुनने और डा. अपूर्व पुराणिक (इंदौर) ने बोलने में मांसपेशियों की भूमिका बताई। डा. मंजरी त्रिपाठी (दिल्ली) ने वृद्धावस्था की मिर्गी, डा. संगीता रावत (मुंबई) ने महिलाओं में मिर्गी और डा. पुनीत अग्रवाल ( दिल्ली ) ने बीमारी के सस्ते उपचार पर व्यख्यान दिया।
तीन रुपये रोज में उपचार संभव
डाक्टरों ने बताया कि मिर्गी के उपचार के लिए महंगी दवाइयां (50 से 60 रुपये रोज) दी जा रही हैं जबकि कई सस्ती दवाइयां भी बाजार में मौजूद हैं। 60 से 70 फीसदी मरीजों को उपचार फीनो वाल्वीटोन की गोली से हो सकता है। यह तीन रुपये की है और दिन में सिर्फ एक गोली लेनी होती है।
आज गांधी को करेंगे नमन
इनकॉन के दूसरे दिन गांधी जयंती मनाई जाएगी। इसके लिए चिकित्सक मेहताब बाग में जुटेंगे। संयोजक प्रो. पीके माहेश्वरी ने बताया कि इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भी शबाना आजमी होंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें