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पर्यावरणविद एमसी मेहता और 'नीरी' ने देखा यमुना का हाल, आगरा के सीवर सिस्टम से असंतुष्ट

Sat, 08 Feb 2020 12:28 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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पर्यावरणविद एमसी मेहता और नीरी की टीम - फोटो : अमर उजाला
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ताजमहल के पीछे यमुना नदी में जिस जगह से सिल्ट हटाने, सफाई के आदेश राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के थे, वहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आई कमेटी को दलदल और कचरे के ढेर मिले। ताजमहल के पीछे यमुना नदी में पानी का बहाव बंद मिला तो कागजों में टेप पूर्वी गेट नाला यमुना नदी में सीधा गिरता हुआ मिला। 
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धांधूपुरा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के इनलेट और आउटलेट का नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) ने सैंपल भरा। नीरी के वैज्ञानिक डॉ. एसके गोयल और पर्यावरणविद एमसी मेहता ने शुक्रवार को एसटीपी, पूर्वी गेट नाला, यमुना नदी, लेदर पार्क, कीठम झील, पार्क माइनर और एसएन मेडिकल कॉलेज का जायजा लिया। एमसी मेहता ने दो दिन के दौरे के बाद कहा कि आगरा के सीवर सिस्टम और व्यवस्थाओं से वो संतुष्ट नहीं हैं।

बर्न करके नहीं दिखा सके मीथेन गैस

सुप्रीम कोर्ट में ताज मामलों के याचिकाकर्ता एमसी मेहता दोपहर में 78 एमएलडी क्षमता के धांधूपुरा एसटीपी पहुंचे। यहां नीरी ने पानी के नमूने लिए। मेहता ने आउटलेट पर उठते झाग पर सवाल पूछे। एसटीपी से गैसें निकलने पर निदान के बारे में पूछा तो बताया गया कि मीथेन गैस बर्न करते हैं, पर कंपनी के कर्मचारी मीथेन को बर्न करके दिखा नहीं सके। 
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उन्होंने एसटीपी के पास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य का हवाला दिया। यहीं पर प्रस्तावित एसटीपी के लिए पेड़ काटने के प्रस्ताव पर मेहता ने कहा कि विदेशों में मल्टीस्टोरी टैंक बनाकर जगह बचाई जाती है। पेड़ प्लांट की दूषित गैसों और लोगों के बीच बैरियर का काम करेंगे।
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मेडिकल कॉलेज में सिल्ट से भरा मिला नाला

एमसी मेहता और नीरी वैज्ञानिक एसके गोयल अधिकारियों के साथ सुबह एसएन मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां उन्होंने मल्टी स्पेशिएलिटी सेंटर की बिल्डिंग देखी और इसके नजदीक कॉलेज बीच से गुजर रहे खुले नाले को देखा, जिसमें सिल्ट भरी थी। कचरे के ढेर देखकर मेहता ने कहा कि इससे इन्फेक्शन हो जाएगा। 

इसी तरह शाहजहां गार्डन, सर्किट हाउस के लिए ब्रिटिश काल में बनी पार्क माइनर को नाला बनाने पर मेहता ने आपत्ति जताई। पर्यावरणविद ताजमहल के पास ताज टैनरी पहंचे, जहां से यमुना नदी की बदहाली देखी। नाले से यमुना में पहुंची सिल्ट पर जलनिगम अधिकारियों से जवाब मांगा।

पार्क में एसटीपी, ईटीपी का क्या काम, ड्रेन में छोड़ेंगे?

पर्यावरणविद् एमसी मेहता शाम को महुअर स्थित लेदर पार्क पहुंचे, जिस पर दस साल से रोक लगी हुई है। यहां वो किसानों से मिले।किसानों ने जबरन जमीन लेने और उपजाऊ जमीन जाने की जानकारी दी। मेहता ने यहां पूछा कि मास्टर प्लान में औद्योगिक क्षेत्र जहां प्रस्तावित है, उसकी जगह यहां विस्तार क्यों। 

लेदर पार्क में एसटीपी और ईटीपी का क्या काम। जो वेस्ट निकलेगा, उसे ड्रेन में छोड़ेंगे तो यह यमुना में पहुंचकर प्रदूषित करेगा। यहां से वह कीठम झील पहुंचे, जहां ईको सेंसिटिव जोन में हुए निर्माण का जायजा लिया। शहर में इतनी बड़ी झील और प्रवासी पक्षियों को देखकर वो हैरत में पड़ गए।
 
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