कासगंज। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और नई पहल की गई है। सरकार ने पर्यावरण के संरक्षणकर्ताओं को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। इसके लिए ऑक्सी कार्ड योजना लागू की गई है।
पौधों के रोपण से लेकर उनके पोषण तक की बेहतर देखभाल करने वालों को सरकार ऑक्सी कार्ड देगी। यह एक पुरस्कार के रूप में होगा। इस कार्ड में पूरा ब्यौरा दर्ज होगा। धरा का शृंगार हरियाली से करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार नित नई योजनाएं बना रही है।
पौधरोपण में एक बार फिर कासगंज जिले में नए इतिहास की तैयारी की गई है लेकिन इस बार एक अनोखी पहल हो रही है। किसानों और ग्रामीणों को प्रोत्साहित करने के लिए अब उन्हें सरकार की ओर से कार्ड दिया जाएगा।
इस कार्ड को ऑक्सी कार्ड का नाम दिया जाएगा, क्योंकि पेड़ों का सरोकार सीधे ऑक्सीजन से है। इसलिए पौधों की देखभाल करने वाले संरक्षणकर्ताओं को पर्यावरण एवं ऑक्सीजन मित्र माना जाएगा।
प्रत्येक किसान को सौंपी जाएगी जिम्मेदारी पौधरोपण के लिए इस बार एक और पहल की गई है। किसान योजनाओं का लाभ उठाने वाले प्रत्येक किसान को पौधरोपण की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी और पौधरोपण करने वाले प्रत्येक किसान को यह कार्ड दिया जाएगा। इसके पीछे मकसद है कि जनपद की धरा को हरा भरा बनाना है।
क्या है ऑक्सी कार्ड
ऑक्सी कार्ड आधार कार्ड की तरह है लेकिन यह पुरस्कार के रूप में दिया जाएगा। इस कार्ड को रखने वाले संरक्षण दाताओं को बेहतर सम्मान के नजरिए से देखा जाएगा। इस कार्ड में पूरा ब्यौरा दर्ज होगा। किस प्रजाति के पौधे लगाए गए हैं। कितने पौधे संरक्षित हैं। पौधों की क्या ग्रोथ हो चुकी है। यह सभी जानकारी कार्ड में शामिल रहेंगी।
सरकारी मुलाजिमों को नहीं मिलेगा कार्ड
ऑक्सी कार्ड सिर्फ उन्हीं लोगों को दिया जाएगा जो किसी सरकारी विभाग से नहीं जुड़े हैं और निजी तौर पर पौधों का संरक्षण कर रहे हैं, क्योंकि सरकार ने माना है कि सरकारी कर्मचारियों को तो काम की एवज वेतन दिया जा रहा है। ऐसे में निजी लोगों को ऑक्सी कार्ड का प्रोत्साहन दिया जाए।
फैक्ट फाइल
-21 लाख पौधे रोपित करने का इस बार है लक्ष्य
-23 विभागों को सौंपी गई है जिम्मेदारी
-600000 पौधे रोपेगा वन विभाग
-1500000 पौधे रोपेंगे अन्य विभाग
- शासन के निर्देश पर ऑक्सी कार्ड की तैयारियां कर रहे हैं। पहली बार यह पहल की जा रही है। कासगंज जिले में उन सभी लोगों को चयनित किया जाएगा जो पौधों का रोपण करेंगे और उनका बेहतर संरक्षण करेंगे। - दिवाकर वशिष्ट, डीएफओ।
रिपोर्ट एवं संपादन अजय झंवर