हेल्प डेस्क पर छात्र-छात्राओं की लगी लाइन
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आगरा के डॉक्टर भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क परिसर में डिग्री, मार्कशीट व अन्य समस्याओं के संबंध में बाहर से आने वाले छात्र-छात्राओं और अभिभावकों के लिए बिना पास के अंदर जाने पर रोक लगा दी गई। गेट पर पहुंचने पर सुरक्षा गार्डों ने उन्हें रोक दिया। कुछ लोगों को धक्के देकर गेट के पास से हटाया गया। गेट पास से प्रवेश की व्यवस्था बनाई गई है। पहले दिन यह भी चरमरा गई। बहुत से छात्र-छात्राओं को प्रवेश ही नहीं मिला।
विश्वविद्यालय में मंगलवार को समाजवादी छात्रसभा के कार्यकर्ताओं ने कुलपति का घेराव किया था। विभिन्न मांगों के संबंध में विरोध-प्रदर्शन किया था। इसके बाद बुधवार से प्रवेश की व्यवस्था में बदलाव कर दिया गया। गेट नंबर दो से ही आवासीय संस्थानों में अध्ययनरत छात्रों, बाहर से विभिन्न कार्यों से आने वाले छात्रों व अभिभावकों को प्रवेश दिया गया।
वह भी पहले हेल्प डेस्क पर जाकर गेट पास बनवाना पड़ा। दोपहर तक एक काउंटर चला। लंबी लाइन में छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को लगना पड़ा। जानकारी के अभाव में जो छात्र-छात्राएं और अभिभावक गेट पर पहुंच रहे थे, उन्हें लौटा दिया जा रहा था।
सिस्टम में दिक्कत से मैनुअल गेट पास बनाए गए
सिस्टम खराब होने से कंप्यूटर से गेट पास नहीं बनाए गए। मैनुअल गेट पास बनाया गया। छात्रों को पौन घंटे तक लाइन में लगना पड़ा। दोपहर बाद काउंटर बढ़ाकर तीन किए गए। दूरदराज से आए लोगों को लाइन में लगकर परेशान होना पड़ा।
छात्र-छात्राएं एक ही लाइन में लगे
हेल्प डेस्क पर अव्यवस्था की स्थिति इस कदर रही कि छात्र-छात्राओं को एक ही लाइन में लगा दिया गया था। सामाजिक दूरी का पालन भी नहीं कराया गया। दोपहर में गेट नंबर दो पर बीएएमएस के छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, उस दौरान गेट पूरी तरह से बंद कर दिया गया। गेट पास बनवाकर अभिभावक व छात्र-छात्राएं गेट नंबर तीन पर पहुंचे, वहां से लौटा दिया गया। गेट नंबर दो से ही प्रवेश की अनुमति की बात कही।
'आठ बार चक्कर लगा चुका हूं'
इटावा से आए अजय भदौरिया ने बताया कि मार्कशीट में संशोधन कराने के लिए विश्वविद्यालय के आठ बार चक्कर लगा चुका हूं। हर बार कोई न कोई कमी बताकर लौटा दिया जाता है। आधे घंटे से लाइन में पास बनवाने के लिए लगा हूं।
दो वर्ष में नामांकन संख्या नहीं मिली
मथुरा के नरेंद्र ने कहा कि नामांकन संख्या के लिए 11 जनवरी 2020 को आवेदन किया था। चार बार विश्वविद्यालय की दौड़ लगाने के बाद भी काम नहीं हो पाया है। पौन घंटे से लाइन में लगा हुआ हूं।
तीन माह में मार्कशीट में संशोधन नहीं हो पाया
कासगंज के गंजडुंडवारा से आए शिवकांत ने बताया कि वर्ष 2014 में विश्वविद्यालय से बीएड किया था। मार्कशीट में अंकों में विभिन्नता है। संशोधन के लिए 20 नवंबर 2011 को आवेदन किया था। तीन माह में संशोधन नहीं हो पाया है।
पहले दिन कुछ समस्या हुई, काउंटर बढ़ाए जा रहे
विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रोफेसर अजय तनेजा ने बताया कि पहले दिन कुछ तकनीकी समस्या आई। इससे पास बनने में देरी हुई। काउंटरों की संख्या बढ़वाई जा रही है। जिससे छात्र-छात्राओं व अभिभावकों को देर तक लाइन में न लगना पड़े।