जॉर्ज एंथनी जॉन के खजाने में दुर्लभ किताबें हैं। उन्होंने एक तरफ जीवनी मंडी में पांच मिलों का निर्माण कराया। दूसरी तरफ सदर बाजार और पालीवाल पार्क में दो लाइब्रेरी स्थापित कीं। दोनों लाइब्रेरियों में करीब 54 हजार किताबें हैं। सदर में नंद सिनेमा के पास क्वीन लाइब्रेरी बंद है, जबकि पालीवाल पार्क स्थित जोंस पब्लिक लाइब्रेरी गुलजार है।
इसकी पहली मंजिल पर 124 प्राचीन मूर्तियों का संग्रहालय भी बना है। जीए जोन की पोती मोरिन जोन ने बताया कि दादा ने इंग्लैंड की महारानी क्वीन विक्टोरिया के नाम पर सदर बाजार में क्वीन लाइब्रेरी बनवाई थी। इसमें 40 हजार किताबें हैं। लाइब्रेरी का फर्श लकड़ी का बना है, ताकि पढ़ते समय ध्यान भंग न हो।
यह लाइब्रेरी बाद में छावनी परिषद के हैंडओवर हो गई। यहां लाइब्रेरी बंद मिली। करीब 40 वर्षों से लाइब्रेरी के एक कमरे में किराए पर रह रहीं मेनिया पॉल ने बताया कि लाइब्रेरी के लिए फादर जोन ने अपना बंगला दान किया था। करीब 1.3 एकड़ में बनी इस लाइब्रेरी में अब सफाई कर्मियों के अलावा कोई नहीं रहता।
पालीवाल पार्क स्थित जोंस पब्लिक लाइब्रेरी 1928 में बनी। मोरिन जोंस ने बताया कि तब इसमें अंग्रेजी साहित्य था, लेकिन फादर जोन को भारतीय संस्कृति व साहित्य से भी गहरा लगाव था। उनके जाने के बाद 1945 में लाइब्रेरी का पुनरुद्धार किया गया।
लाइब्रेरी नगर निगम प्रशासन के हैंडओवर हो गई। लाइब्रेरियन सुभाष कुमार ने बताया कि अभी लाइब्रेरी में करीब 14 हजार किताबें हैं। सबसे पुरानी किताब 1932 की है। बाद में यहां एक संग्रहालय खोला गया। संग्रहालय में हिंदू देवी-देवताओं की 124 प्राचीन मूर्तियां रखी हुईं हैं।