शहर से गांव तक सार्वजनिक उपयोग की भूमियों पर अवैध कब्जों का अंबार है। जिले की 6 तहसीलों में शमसान, खलिहान से लेकर तालाब, पोखर, पंचायत घर व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर 385 अवैध कब्जे व निर्माण थे। अवैध कब्जों से 1.22 करोड़ राजस्व क्षति हो चुकी है। इनके विरुद्ध बेदखली व क्षतिपूर्ति वसूली के आदेश के बावजूद महज 69 कब्जे हटाए गए हैं जबकि 316 अवैध कब्जे नहीं हटे। 1.17 करोड़ क्षतिपूर्ति वसूली भी बकाया है। उच्च न्यायालय व राजस्व परिषद ग्राम सभा में सार्वजनिक उपयोग की भूमियों पर अवैध कब्जों को लेकर सख्त है, लेकिन जिला प्रशासन के राजस्व अधिकारी बेदखली आदेश के बाद भी निर्माण हटाने व क्षतिपूर्ति वसूली में लापरवाह हैं।
जिले में 2.96 लाख वर्ग मीटर (29.68 हे.) सार्वजनिक भूमि पर मकान, दुकान व अन्य अवैध निर्माण और कब्जे हो चुके हैं। प्रशासन ने 385 कब्जेदारों को हटाने के निर्देश दिए। 385 कब्जों में से 31 दिसंबर तक 69 कब्जे ही हटाए गए। बाकी 316 स्थानों पर कार्रवाई नहीं हो सकी। 2.96 लाख वर्ग मीटर भूमि में मात्र 22 हजार वर्ग मीटर भूमि कब्जा मुक्त कराई गई। करीब 2.75 लाख वर्ग मीटर भूमि पर अभी अवैध निर्माण खड़े हैं।
1.22 करोड़ रुपये में से महज 5.83 लाख हर्जाना वसूला
385 कब्जेदारों पर 1.22 करोड़ रुपये का राजस्व क्षति हर्जाना लगाया गया। जनवरी से दिसंबर तक 5.83 लाख रुपये वसूले गए। 1.17 करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति कब्जेदारों पर बकाया है। ये हाल तब है जब राजस्व परिषद जिलाधिकारी से सार्वजनिक संपत्तियों पर कब्जे हटाने व क्षतिपूर्ति वसूली में लापरवाही पर अंसतोष जता चुका है।
विकास कार्यों पर पड़ता है असर
कलक्ट्रेट भूलेख विशेषज्ञ व पूर्व कानूनगो गोविंद शर्मा ने बताया कि सार्वजनिक भूमि उपयोग पर हर्जाना वसूली में लापरवाही से ग्राम्य विकास पर असर पड़ता है। इसका पैसा विकास कार्यों में लगता था, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा।
करेंगे मासिक समीक्षा
सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं। अवैध कब्जों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाए। मासिक बैठक में फिर प्रगति समीक्षा की जाएगी। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी
सावर्जनिक भूमि पर अवैध कब्जे
तहसील अवैध कब्जे क्षेत्रफल हे. राजस्व क्षति
सदर 53 2.7075 52,44,998 रुपये
बाह 79 9.8075 30,49,942 रुपये
फतेहाबाद 84 7.1699 30,06,162 रुपये
किरावली 53 0.7994 6,25,529 रुपये
खेरागढ़ 60 6.1829 1,36,419 रुपये
एत्मादपुर 56 3.1313 2,25,553 रुपये
(आंकड़े 31 दिसंबर 2020 तक जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध )