नाविक द्वारिका ने कहा कि आम दिनों में कान्हा के भक्तों के यहां आने से अच्छी खासी आमदनी हो जाती थी। लेकिन अब तो बुरा हाल हो गया है। इसके अलावा आय का कोई और साधन नहीं है। अब इंतजार कर रहे हैं कि कब बीमारी से निजात मिले।
नाविक लक्ष्मीनारायण कहते हैं कि कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए। पिछले करीब डेढ़ साल से इस महामारी से सबकुछ चौपट कर दिया है। रोजी रोजी का संकट है। नाव ही आय का सहारा है। अब कोई यहां नहीं आता है।
सोनू ने कहा कि लॉकडाउन के बाद भी घर से निकल आते हैं कि शायद कोई ग्राहक मिल जाए, लेकिन शाम को फिर मायूस होकर वापस चले जाते हैं। डेढ़ माह से ऐसा ही चल रहा है। परेशानी खड़ी होने लगी हैं।