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Agra News: कच्ची उम्र में टूट रहे जज्बात...साथिया का सहारा

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आगरा। प्रेम प्रसंग में दूरियां बढ़ने और आपसी मतभेद होने से छात्राएं और युवतियां भावनात्मक सहारा मिलने की उम्मीद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित साथिया केंद्र पहुंच रही हैं। इनमें कुछ तो हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की छात्राएं हैं। काउंसलर उनकी काउंसलिंग कर तनाव दूर रखने और खुद पर ज्यादा ध्यान देने के लिए समझा रही हैं।
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साथिया परामर्श केंद्र की काउंसलर रूबी बघेल बताती हैं कि किशोर और युवा उम्र में छात्राओं में कई तरह के परिवर्तन देखने को मिलते हैं। इस उम्र में लगाव की स्थिति अधिक होती है। इससे वो प्रेम प्रसंग के चक्कर में पड़ जाती हैं और ब्रेकअप या नोकझोंक होने पर तनाव को बर्दाश्त नहीं कर पातीं।
अच्छी बात यह है कि केंद्र में आने वाली ज्यादातर छात्राएं और युवतियां काउंसलिंग के जरिये तनाव से बाहर आना चाहती हैं। पिछले चार महीनों में रिश्तों से जुड़े मामलों में तकरीबन 30 से 35 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। प्रतिदिन पांच-छह मामले ऐसे आते हैं जिसमें रिलेशनशिप में ब्रेकअप, अविश्वास, झगड़े, उपेक्षा के केस अधिक हैं। साथियों केंद्र में 10-19 साल तक की किशोरियों, युवतियों की काउंसलिंग की जाती है।
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केस-1
बदले व्यवहार से परेशान, काउंसलिंग बनी सहारा
वजीरपुरा की रहने वाली किशोरी ने बताया कि उसका रिश्ता पिछले कुछ महीनों से बिगड़ता जा रहा था। पार्टनर के बदलते व्यवहार और शक करने की आदत ने उसे मानसिक रूप से कमजोर कर दिया। कई कोशिशों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं आ रहा था। किसी के बताने पर साथिया केंद्र पहुंची। काउंसलिंग के बाद उसने खुद को संभाला और बातचीत के जरिए रिश्ते को बेहतर दिशा देने की कोशिश की।


केस-2
नौकरी शुरू की तो बदला जीवन

लोहामंडी की रहने वाली किशोरी ने रिश्ते में तनाव के चलते काउंसलिंग कराई। इसमें परामर्श के तौर पर नौकरी करने की सलाह दी गई। नौकरी में व्यस्त रहकर तनाव से निजात मिली साथ ही बेहतर भविष्य की राह भी खुलने लगी है। वह कहती है कि रिश्ते में तनाव इस कद्र बढ़ गया था कि खुदकुशी करने के हालात पैदा हो गए थे लेकिन परामर्श केंद्र से नया जीवन मिल गया।


केस- 3

गलतफहमियों ने बढ़ाई दूरी
तेलीपाड़ा निवासी 19 वर्षीय युवती का कहना है कि सोशल मीडिया पर छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़े होने लगे। पार्टनर की चैट और पोस्ट को लेकर गलतफहमी ने रिश्ते को कड़वाहट से भर दिया। काउंसलिंग में उसे ओवरथिंकिंग कम करने और भरोसे के साथ संवाद बढ़ाने की सलाह दी गई।


केस-4

परिवार का दबाव, रिश्ते में दरार
वजीरपुरा में रहने वाली किशोरी ने बताया कि उसके और पार्टनर के परिवारों के बीच विचारों का मतभेद रहता था। दोनों पर रिश्ते को खत्म करने का दबाव बनाने के कारण मानसिक तनाव से गुजर रही थी। परामर्श केंद्र में उसे भावनात्मक स्थिरता और निर्णय क्षमता मजबूत करने की ट्रेनिंग दी गई।


धैर्य, सहनशीलता की कमी से दिक्कत

भावनात्मक संवाद और नैतिक मार्गदर्शन के अभाव में युवाओं में धैर्य, सहनशीलता और आपसी समझ कमजोर हो जाती है। साथ ही सीमित कॅरिअर अवसर और तीव्र प्रतिस्पर्धा युवाओं में तनाव, असुरक्षा और कुंठा को बढ़ाती है। इन सभी कारकों का संयुक्त प्रभाव उनके व्यक्तिगत संबंधों पर भी पड़ता है। - प्रो. अरशद, निदेशक, सामाजिक विज्ञान संस्थान, डॉ. आंबेडकर विवि
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काउंसलर की सलाह

- किशोर उम्र की छात्राएं पढ़ाई और कॅरिअर पर ध्यान दें।

- रिश्ते में तनाव आते ही युवतियां संवाद बढ़ाएं।
- छोटी बातों को दिल पर न लें, गलतफहमियों को तुरंत दूर करें।

- जरूरत पड़ने पर पेशेवर काउंसलिंग जरूर लें।
- सोशल मीडिया को रिश्तों पर हावी न होने दें।
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