प्यार बहुत था दोनों बहनों में। परिवार वालों की मानें तो बचपन में दोनों कभी एक पल के लिए भी एक-दूसरे से अलग नहीं हुआ करती थीं। दोनों बहनों का जोड़ा गांव में ही नहीं रिश्तेदारी तक में पहचाना जाता था।
शादी के बाद भी दोनों का प्यार कम नहीं हुआ। शादी भी दोनों बहनों की एक ही परिवार में हुई थी। खुश थी दोनों बहनें। लेकिन यह कौन जानता था कि दोनों दुनिया से भी एक साथ ही रुखसत होंगी। बिल्कुल यही हुआ। बड़ी बहन के शव पर बिलखते हुए छोटी ने भी प्राण त्याग दिए।
जैंत निवासी रामसिंह महाशय की बड़ी बेटी मोहनदेवी और छोटी शीला देवी के बीच के प्यार को जानना है तो जैंत के किसी शख्स से पूछिए। इन दोनों बहनों के बीच इतना लगाव था कि एक दूसरे से एक पल के लिए भी अलग नहीं होती थीं। दोनों के बीच का प्यार देखकर ही उनके परिवार वालों ने दोनों की शादी चौमुंहा में की थी।