रमजान उल मुबारक में अलविदा के जुमे की नमाज 22 मई ( शुक्रवार) को अदा की जाएगी। आगरा में लॉकडाउन के कारण शाही जामा मस्जिद के इमाम और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने रोजेदारों से घरों में रहकर ही नमाज अदा करने की अपील की है।
रमजान के महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहले 10 दिन रहमत और बरकत के होते हैं तो अगले 10 दिन मगफिरत की इबादत होती है। आखिरी 10 दिनों में जहन्नुम की आग से छुटकारे की दुआ की जाती है। इस दौरान शब-ए-कद्र भी आती है। कई रोजेदार एतकाफ (एकांतवास) की इबादत में बैठे हैं। वो ईद-उल-फितर के चांद का दीदार करने के बाद ही एतकाफ से उठेंगे।
शाही जामा मस्जिद के इमाम मौलाना इरफान उल्ला खां निजामी ने कहा कि अलविदा का जुमा इसलिए खास होता है कि इस मुबारक महीने का ये आखिरी जुमा होता है, इसके बाद ही रोजेदारों को खुशियां देने के लिए ईद-उल-फितर का त्योहार आता है। मुस्लिम भाई जुमा अलविदा की नमाज को घर पर ही अदा करें।
शाही जामा मस्जिद में नहीं आएं
इस्लामियां लोकल एजेंसी के अध्यक्ष हाजी असलम कुरैशी ने बताया कि शाही जामा मस्जिद में जुमा अलविदा को भी वही लोग नमाज पढ़ने आएंगे, जोकि लॉकडाउन के दौरान अभी तक नमाज अदा करते रहे हैं। यहां किसी तरह की भीड़ लगाने नहीं आएं। घरों में ही नमाज अदा करें।
'लोगों को आरोप लगाने का मौका नहीं दें'
जमीतुल कुरैश के उपाध्यक्ष हाजी जमीलउद्दीन ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान सरकार की गाइड लाइन के मुताबिक जुमा अलविदा की नमाज घरों में अदा करें। मस्जिदों में नमाज पढ़ने को जमा होने से संक्रमण का खतरा बढ़ेगा, हम नहीं चाहते कि लोग समाज पर आरोप लगाएं। इसलिए घर में नमाज अदा करें। ईद की तैयारियां करें।
सेंवई, खजले की बिक्री कराए प्रशासन
अली मदद वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष अली कैसर प्यारे मियां ने कहा कि जिला प्रशासन ने रमजान के दौरान मीट, मछली की बिक्री नहीं होने दी। कम से कम ईद उल फितर के मौके पर सेंवई, खजला, फैनी की बिक्री के लिए इजाजत दे। खानपान के इस सामान को बाहरी जिलों से मंगवाया जाए, ताकि मुस्लिम ईद मना सकें।