एसएन के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु यादव ने बताया कि सात दिन में ओपीडी में 680 मरीज आए, इसमें से 320 मरीजों की आंखों में प्रदूषण के चलते परेशानी मिली। धूल-धुआं के कण जाने से खुजली, जलन हो रही है। आंख रगड़ने से धुंधला दिखने, कॉर्निया में दर्द हो रहा है। इनमें बच्चों की संख्या करीब 60 फीसदी है।
सांस लेने में भी हो रही परेशानी
बोदला रोड पर रहने वाले संजय सिंह के नौ साल के बेटे को धूल से एलर्जी है। बीते दिनों से प्रदूषण बढ़ने के कारण सांस लेने में परेशानी हो रही है। नींद पूरी नहीं हो पा रही, भूख भी कम हुई है। गुस्सा करना, चिल्लाने की परेशानी भी हो रही है। एसएन में डॉक्टर को दिखाने पर प्रदूषण कम होने पर सामान्य होने की बात बताई।
दवा व भाप देने से मिला आराम
टेढ़ी बगिया 100 फुटा पर रहने वाले प्रदीप कर्दम की 11 साल की बच्ची को दमा की परेशानी है। तीन-चार दिन से रात में घर्र-घर्र की आवाज होने, सांस लेने में परेशानी, जल्दी-जल्दी सांस लेने की परेशानी से वह चिड़चिड़ी भी हो गई। डॉक्टर को दिखाने के बाद दवा और भाप देने से आराम मिला है। अब खाना भी खाने लगी है।
ये बरतें सावधानी
- सुबह-शाम बच्चों को बाहर जाने से बचाएं। स्कूल के रास्ते में भी मास्क न उतारें।
- शाम को गर्म पानी की भाप जरूर दिलवाएं।
- दमा से पीड़ित बच्चों की दवाएं बंद न करें।
- दमा रोगियों की परामर्श से इन्हेलर की डोज बढ़वाएं।
- गुनगुना पानी पीएं, ठंडी सामग्री का उपयोग न करें।
- बच्चों को गर्म कपड़े पहनाकर रखें, सर्दी से बचाएं।
(जैसा कि डॉ. निखिल चतुर्वेदी, बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया)