आगरा। सरकारी आंकड़ों में अब तक हवा बेहतर रही, लेकिन शुक्रवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संजय प्लेस ऑटोमेटिक स्टेशन पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 320 दर्ज किया गया। बोर्ड की ओर से संजय प्लेस में 580 दिन पहले एक्यूआई इतनी खराब श्रेणी में बताया गया था। धूल के गुबार के बीच सूक्ष्म कण पीएम-2.5 की मात्रा 591 और पीएम-10 की मात्रा 793 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक दर्ज की गई है। इन हालातों में अस्थमा और सांस रोगियों का सांस लेना मुहाल है।
शुक्रवार की रात सर्द रही, जिससे मिक्सिंग हाईट के नीचे आ जाने और रात में स्मॉग के कारण एक्यूआई खराब श्रेणी में पहुंच गया। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के संजय प्लेस स्थित ऑटोमेटिक स्टेशन पर यह 320 दर्ज किया गया। पहली बार यह स्मार्ट सिटी के सेंसर के आंकड़े के नजदीक है। स्मार्ट सिटी के आंकड़ों में संजय प्लेस का एक्यूआई 403 दर्ज किया गया। इससे पहले दोनों के बीच तीन गुना का अंतर रहता था। बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक इससे पहले 22 मई 2024 को संजय प्लेस का एक्यूआई 338 पहुंचा था। तब से अब तक संजय प्लेस की हवा की गुणवत्ता इस स्तर पर नहीं पहुंची।
तीन माह से बिगड़ी है गुणवत्ता
दिसंबर में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ही आंकड़ों में संजय प्लेस का एक्यूआई 10 दिन खराब स्थिति में रहा है। वहीं नवंबर में भी 10 दिन तक एक्यूआई खराब श्रेणी में दर्ज किया गया था। उससे पहले अक्तूबर में 7 दिन तक एयर क्वालिटी खराब रही थी।
100 किमी से ज्यादा खुदी पड़ी हैं सड़कें
शहर में जलनिगम की पानी की लाइनों, सीवर लाइनों और मेट्रो परियोजना के साथ सीएम ग्रिड, एयरटेल, टोरंट पावर की ओर से 100 किमी से ज्यादा लंबी सड़कें खुदी पड़ी हैं। सड़कें खोदने के बाद मिट्टी जहां की तहां छोड़ दी गई, जिससे वाहनों के निकलने पर धूल के गुबार उठ रहे हैं। पश्चिमपुरी, अमल गार्डन रोड, हरीश नगर के सामने, शास्त्रीपुरम रोड, सालासर हनुमान मंदिर, यूपीएसआईडीसी से हिलमैन स्कूल रोड समेत क्षेत्रों में खुदाई की गई है, जहां पानी का छिड़काव न होने के साथ ही सड़क पर पड़ी मिट्टी नहीं हटवाई गई। पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता के मुताबिक इस वजह से धूल कणों की मात्रा बेहद खतरनाक स्तर 783 माइक्रोग्राम तक पहुंच गई है। मेट्रो की ओर से 29 किमी हिस्से में कॉरिडोर निर्माण में धूल नियंत्रण के उपाय न होने के कारण एक्यूआई रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा है।
स्मार्ट सिटी के आंकड़ों में यहां खतरनाक हवा
बाग फरजाना में 411, धूलियागंज में 426, कलाकृति में 420, छीपीटोला में 402, राजपुर चंगी में 341, सदर भट्टी में 365, ईदगाह पर 363 और चंद्रशेखर पार्क पर 385 एक्यूआई दर्ज किया गया।
- धूल नियंत्रण के उपाय नहीं किए जा रहे हैं। आंख, कान, नाक सभी बता देते हैं कि प्रदूषण कितना है, ऐसे में आंकड़ों की बाजीगरी की जरूरत नहीं है। हालात बेहद भयावह हैं। मास्क लगाकर ही निकलें। एनजीटी को हर सड़क, निर्माण, मेट्रो, पाइपलाइन बिछाने में धूल के गुबार के फोटो भेज रहे हैं।- डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ, पर्यावरणविद