आगरा। शहर में बढ़ता प्रदूषण बच्चों को दमा की बीमारी दे रहा है। फेफड़ों में प्रदूषित हवा पहुंचने से वे इसकी चपेट में आ रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के अध्ययन में छह फीसदी को अस्थमा की बीमारी है। इसकी तीन बड़ी वजह वायु प्रदूषण, मोटापा और एलर्जी है।
नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के उपाध्यक्ष और एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर राजेश्वर दयाल ने बताया कि ओपीडी में रोजाना 130 बच्चे आ रहे हैं, इसमें से करीब आठ बच्चों में अस्थमा की परेशानी मिल रही है। उनकी उम्र पांच से 14 साल है। इनमें छह से 10 साल के बच्चे अधिक हैं, जिनकी संख्या करीब 70 फीसदी है। परिजनों से पूछताछ में पाया गया कि वो वायु प्रदूषित क्षेत्रों में रहते हैं। वाहनों का धुआं, धूल और कारखानों की डस्ट हवा में रहते हैं। घर के एक-दो सदस्य धूम्रपान के भी आदी हैं। मोटापे के कारण फेफड़ों में ऑक्सीजन की मात्रा कम पहुंचने से भी बच्चों में दमा पनपा। बाकी के मरीजों में एलर्जी और जेनेटिक परेशानी मिली। बीते 10 सालों में प्रदूषण बढ़ने से दमा के मरीज में वृद्धि हुई है। जहां 2012 में करीब पांच फीसदी बच्चों को ये बीमारी थी, अब छह फीसदी हो गई है।
वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉक्टर जीवी सिंह ने बताया कि सांस नलिकाओं में सूजन आने के कारण ये संकुचित हो जाती हैं, जिससे फेफड़ों में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंचती और दमा पनपता है। हाल ही में अस्थमा के 120 मरीजों पर अध्ययन किया गया। इसमें 74 फीसदी पुरुष और 26 फीसदी महिला शामिल रहे। इनकी उम्र 18 साल से अधिक रही, पाया गया कि 11 फीसदी मरीजों ने नियमित दवाई ली और ओपीडी में दिखाने आए। इनमें मर्ज नियंत्रित मिला। बाकी के 89 फीसदी मरीजों में अस्थमा बिगड़ा पाया गया। इन्होंने दवाएं बीच में बंद कर दी थी, हालत बिगड़ने पर फिर से दिखाने आए। ऐसे में तय हुआ कि नियमित उपचार से यह बीमारी नियंत्रण में रहती है। बीच में उपचार छोड़ने से मरीज की हालत बिगड़ सकती है।
अस्थमा के ये हैं लक्षण
- सुबह-सुबह खांसी होना या बार-बार खांसी होना।
- चलने, खेलने और दौड़ने पर बच्चे की सांस फूलना ।
- धूल धुआं के संपर्क में आने पर खांसी होना।
- सीने से घर्र घर्र की आवाज आना, पसली चलना
इन बातों का रखें ध्यान
- घर में धूम्रपान न करें, किचन में तड़का लगाते वक्त बच्चों को किचन में न आने दें।
- कुत्ता, बिल्ली, बंदर पालने से बचें
- घर में हवा की निकासी बेहतर हो।
- धूल धुआं वाले क्षेत्र में जाने पर मास्क लगाएं।
- पर्दे और चादर साफ करते वक्त मास्क लगाएं ।
- घर में कारपेट बिछाने से बचें।