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Dussehra 2022: सभी करें पहल तो खत्म होंगी ये 10 बुराइयां, इनसे लड़ने के लिए लें संकल्प

Wed, 05 Oct 2022 05:31 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

समाज की 10 सबसे बड़ी बुराइयों के अंत के लिए विभागों के अफसर और जनता को साथ आना होगा। संकल्प लेंगे तो जरूर इनका अंत होगा।   
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दशहरे पर बुराइयों के प्रतीक रावण के पुतले का दहन होता है। असल मायने में दशहरा तभी है, जब समाज की बुराइयां खत्म होंगी। समाज की 10 सबसे बड़ी बुराइयों के अंत के लिए विभागों के अफसर और जनता को साथ आना होगा। संकल्प लेंगे तो जरूर इनका अंत होगा।   

1. अपराध-भ्रष्टाचार

सामाजिक बुराई में यह पहले पायदान पर है। भ्रष्टाचार की जडे़ं सरकारी ही नहीं निजी विभागों में भी जमी हुई हैं, इससे अपराध भी बढ़े। शासन-प्रशासन सख्त निगरानी और कड़े निर्णय से नकेल कस सकती है। 

2. शिक्षा में फर्जीवाड़ा

फर्जी डिग्री और मार्कशीट के बाद डॉक्टरी की पढ़ाई की कॉपियां बदलने का खेल पकड़ा है। सोचिए ऐसी पढ़ाई से समाज को कैसे डॉक्टर मिलेंगे। सरकार ऐसे शिक्षा माफिया के रैकेट और दोषियों पर कार्रवाई करे। 

3. बाल भिक्षावृत्ति

बच्चे देश के भविष्य, कहा यही जाता। हकीकत में ऐसे भी बच्चे हैं जो चौराहों और बाजारों में भीख मांगने के लिए मजबूर हैं। इसे गैंग संचालित करते हैं। भिक्षावृत्ति कर बच्चे कैसे देश के भविष्य बनेंगे।

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4. मिलावटी सामग्री

जिस दूध, पनीर, घी को सेहत बनाने के लिए खा रहे हैं। ये मिलावटी और नकली हैं। इससे किडनी, लिवर, कैंसर समेत कई बीमारियां पनप रहीं हैं। बच्चों का मानसिक-शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। 

5. नकली दवाएं

अस्पताल में भर्ती मरीज जिंदगी-मौत से जूझ रहा है। इलाज के लिए महंगी दवाएं भी खरीदीं, वह भी नकली और अधोमानक निकलीं। आगरा में नकली दवाओं के गैंग पकड़े जा चुके हैं, लेकिन इनका सफाया नहीं हो पाया। 

6. कचरा-गंदगी

ताजमहल देखने आने देश-दुनिया से लोग यहां आते हैं। कचरे के ढेर, दीवारों पर पीक और गंदगी कचौटती है। हम भी गंदगी-कचरा न करने का संकल्प लें, बाकी की सफाई-निस्तारण को अफसर गंभीर बन जाएं। 
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7. पॉलीथिन

सिंगल यूज प्लास्टिक-पॉलीथिन बड़ी बीमारी बन गई है। इसे रोकने का अभियान चंद दिन चला, लेकिन निर्माण यूनिट बंद नहीं कराईं। क्यों न हम खुद ही इसे ना बोलें और घर से ही थैला लेकर निकलें।

8. प्रदूषण

वाहन बढ़ने के साथ पेड़-पौधों की कमी से भी प्रदूषण बढ़ा। नगर निगम समेत विभागों ने अभियान चलाकर पौधे जरूर लगाए, लेकिन आधे से ज्यादा नष्ट हो गए। हम भी पहल करें और हरियाली को सहेजें। 

9. दूषित पानी

50 लाख की आबादी, पीने का पानी के लिए भी मशक्कत। शहर के आधे लोग अब भी दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। गंगाजल आया, लेकिन वह भी पूरे शहर को मयस्सर नहीं है।

10. अतिक्रमण

जिसे मौका मिला अतिक्रमण कर लिया। इससे जाम लगने लगा। सड़क, चौराहे व फुटपाथ पर अतिक्रमण न करें। कोई ऐसा करे तो अफसरों को इसे संज्ञान में लेकर हटवाएं और दोबारा न करने दें।
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