ये क्षेत्र हैं प्रभावित
इन क्षेत्रों की मृदा की हुई जांच ब्लांक बिचपुरी, बरौली अहीर, अकोला, बाह, फतेहाबाद, पिनाहट, सैंया, शमशाबाद, खेरागढ़, जगनेर, रूनकता, खंदौली, एत्मादपुर, फतेहपुर सीकरी, अछनेरा की मृदा की जांच में पाया गया है कि मिट्टी में दिन व दिन जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो रही है।
संपूर्ण भूमि दस वर्षों में हो जाएगी ऊसर
उन्होंने कहा कि ब्लॉक फतेहपुर सीकरी के गांव जाजऊ, सरसा, अरहैरा के क्षेत्र में कुछ जमीन ऊसर हो गई है। वहां पर फसल नहीं हो रही है। वहीं ब्लाॅक अछनेरा के कुछ गांवों में भी स्थिति बेहद खराब है। डॉ संदीप ने बताया कि अगर यही स्थिति रही तो आगामी 10 से 15 वर्षों में आगरा की 3,50,000 हेक्टेयर संपूर्ण कृषि भूमि ऊसर (बंजर) हो जाएगी। इसलिए किसानों को इसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।
हरी खाद व कार्बनिक खाद से होगा लाभ
बताया कि ऐसी स्थिति में किसानों को खेत में हरी व कार्बनिक खाद का प्रयोग करना चाहिए। किसान हरी खाद में खेत में ढेचा व सनई उगाकर उसे पलट सकते हैं। वहीं कार्बनिक खाद में सड़ा गोबर एवं वर्मी कंपोस्ट भी खेत में डाल सकते हैं। ऐसा करने से मिट्टी की सेहत में सुधार होगा और मृदा का पीएच नहीं बढ़ेगा। मिट्टी की जांच कराना जरूरी है।
मिट्टी जांच के लगते हैं केवल 10 रुपये
बताया कि मिट्टी की सेहत में सुधार के लिए मृदा परीक्षण कराना बेहद जरूरी है। मृदा की रिपोर्ट के आधार पर ही कार्बनिक एवं रसायनिक खादों का प्रयोग करना चाहिए। कृषि विज्ञान केंद्र पर एक सैंपल मिट्टी जांच के 10 रुपये लगते हैं। 15 दिन बाद जांच रिपोर्ट आती है। वहीं वैज्ञानिकों ने बताया है कि केंद्र पर महिलाओं के लिए मृदा की जांच निशुल्क की जाती है।