गिरफ्तार किए गए दवा कारोबारी जितेंद्र उर्फ विक्की अरोड़ा और कपिल अरोड़ा
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काला कारोबार : कमीशन पर हॉकरों के जरिए होती है सप्लाई
रेव पार्टी और नाइट क्लब संचालकों से दवा माफिया सीधे संपर्क कर दवाएं बुक कराते हैं। दवा को कमीशन पर हॉकरों के जरिये सप्लाई कराया जाता है। नशे की दवाओं की बात करें तो विभिन्न कंपनियों की दवाओं की कीमत ढाई रुपये से 11 रुपये प्रति टैबलेट है। इनको 100 गुनी कीमत पर रेव पाटियों में परोसा जाता है। इन सभी दवाओं को पीसकर पाउडर बनाया जाता है।
पाउडर की पुड़िया को अल्कोहल में मिलाकर नशा करते हैं। इसके अलावा इंजेक्शन भी इस्तेमाल किए जाते हैं। पंजाब में बड़े पैमाने पर नशे का कारोबार होने के कारण 60 फीसदी सप्लाई वहीं की जाती है। इसके अलावा गाजियाबाद, दिल्ली, हरियाणा में भी सप्लाई हो रही है।
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बिहार और बांग्लादेश में कफ सीरप की अधिक डिमांड हैं, यहां भी 90 रुपये के कफ सीरप 250 रुपये तक में बेचा जाता है। नशे की दवाओं का यह कारोबार करीब 12 साल से चल रहा है। दो लोगों से शुरू हुआ आगरा गैंग में अब नौ लोग शामिल हैं।